मोदी सरकार का बड़ा फैसला: होगी जाति जनगणना, CCPA बैठक में मंजूरी

नई दिल्ली |

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई सुपर कैबिनेट बैठक में सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए आगामी जनगणना में जातिगत गणना शामिल करने का निर्णय लिया है। आज़ाद भारत के इतिहास में यह पहली बार होगा जब केंद्र सरकार जाति आधारित जनगणना कराएगी।

विपक्ष की मांग पर सरकार की मोहर
कई वर्षों से विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों की ओर से जाति जनगणना की मांग उठाई जा रही थी। राहुल गांधी ने बार-बार संसद और चुनावी रैलियों में इस मुद्दे को उठाया था।

बिहार में नीतीश कुमार सरकार ने पहले ही राज्यस्तरीय जातिगत सर्वेक्षण कराया था, जिसके बाद पूरे देश में इसको लेकर चर्चा तेज हो गई थी।

सरकार ने क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस ब्रीफिंग में जानकारी दी कि:

कैबिनेट कमेटी ऑन पॉलिटिकल अफेयर्स (CCPA) ने फैसला लिया है कि अब अगली जनगणना में जातियों की गणना भी की जाएगी। ये काम किसी अलग सर्वे से नहीं, बल्कि मुख्य जनगणना प्रक्रिया का हिस्सा होगा।

उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों ने अपने स्तर पर जातिगत सर्वे किए हैं, लेकिन देश को सामाजिक ताने-बाने को समझने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण की ज़रूरत है।

कांग्रेस पर पलटवार
अश्विनी वैष्णव ने कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा:

“1947 के बाद कांग्रेस की किसी भी सरकार ने जाति जनगणना नहीं कराई। केवल जाति सर्वेक्षण कराए गए, वो भी राजनीतिक उद्देश्य से।”

कैबिनेट के अन्य बड़े फैसले:
शिलॉन्ग–सिलचर हाईस्पीड कॉरिडोर (मेघालय–असम)
लंबाई: 166 किमी, 6 लेन
लागत: 22,864 करोड़
नॉर्थईस्ट भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण

गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य (FRP) तय

वर्ष: 2025-26
दर: ₹355 प्रति क्विंटल
यह एक मानक मूल्य होगा, इससे कम दाम पर किसानों से गन्ना नहीं खरीदा जा सकेगा।

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