छेरछेरा तिहार पर मंत्री टंकराम वर्मा पहुंचे तरपोंगी, घर-घर जाकर लिया अन्न दान

रायपुर। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक लोक पर्व छेरछेरा तिहार के अवसर पर राज्य के राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा धरसींवा विकासखंड के ग्राम तरपोंगी पहुंचे। यहां उन्होंने परंपरा के अनुसार गांव में घर-घर जाकर ग्रामीणों से अन्न दान ग्रहण किया। इस दौरान पूरे गांव में उत्साह, अपनत्व और लोक संस्कृति की सुंदर झलक देखने को मिली।

मंत्री वर्मा ने ग्रामीणों से आत्मीय मुलाकात की और छेरछेरा की परंपरा निभाते हुए अन्न दान स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि छेरछेरा तिहार छत्तीसगढ़ की आत्मा से जुड़ा पर्व है, जो समाज में समानता, सहयोग और दान की भावना को मजबूत करता है। यह पर्व हमें अपनी संस्कृति और जड़ों से जोड़ता है।

उन्होंने आगे कहा कि छेरछेरा केवल अन्न संग्रह का पर्व नहीं, बल्कि भाईचारे, लोक संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं का उत्सव है। छत्तीसगढ़ की लोक परंपराएं हमारी पहचान हैं और इन्हें सहेजकर रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। ऐसे पर्व समाज को जोड़ते हैं और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराते हैं।

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इस अवसर पर ग्रामीणों ने पारंपरिक तरीके से मंत्री का स्वागत किया। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने पूरे उत्साह के साथ छेरछेरा तिहार में भाग लिया। गांव में लोक उल्लास और खुशी का माहौल रहा। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।

गौरतलब है कि छेरछेरा छत्तीसगढ़ का प्रमुख लोक पर्व है, जिसे धान की कटाई के बाद पौष माह (दिसंबर–जनवरी) में मनाया जाता है। इस दिन लोग टोली बनाकर घर-घर जाते हैं और लोकगीत गाते हुए अन्न या दान मांगते हैं—

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“छेरछेरा छेरछेरा, माई कोठी के धान ला हेरा…”

एकत्र किए गए अन्न और सामग्री का उपयोग सामूहिक भोज, जरूरतमंदों की मदद और सामाजिक कार्यों में किया जाता है। यह पर्व अमीर-गरीब और जाति-धर्म के भेद को मिटाकर सामाजिक एकता और संवेदनशीलता को बढ़ावा देता है। छेरछेरा तिहार के माध्यम से एक बार फिर छत्तीसगढ़ की जीवंत लोक परंपराओं की सुंदर झलक देखने को मिली।

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