रायपुर मेकाहारा अस्पताल में दो प्रसूताएं एक ही बेड पर, हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान – सरकार से मांगा जवाब

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। राजधानी रायपुर के डॉ. बी.आर. अंबेडकर मेमोरियल अस्पताल (मेकाहारा) में दो प्रसूताओं को एक ही बेड पर भर्ती किए जाने का मामला अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद बिलासपुर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि “अगर राजधानी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की यह स्थिति है, तो बाकी जिलों में क्या हाल होगा, इसकी कल्पना की जा सकती है।” कोर्ट ने इस घटना को “मानव गरिमा के खिलाफ” बताते हुए सरकार को तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को नोटिस जारी करते हुए 6 नवंबर तक शपथपत्र में जवाब प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि इस तरह की घटनाएं सरकारी सिस्टम की लापरवाही और स्वास्थ्य सेवाओं की खराब स्थिति को उजागर करती हैं।
यह मामला तब सामने आया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें रायपुर मेकाहारा अस्पताल के गायनिक वार्ड में दो प्रसूताएं एक ही बेड पर दिखाई दीं। उनके बीच नवजात शिशु भी मौजूद थे। वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया।
लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस घटना पर कड़ी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि जब राजधानी के सबसे बड़े अस्पताल की यह स्थिति है, तो ग्रामीण और आदिवासी इलाकों के अस्पतालों की हालत का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने बताया कि अस्पताल में मरीजों की बढ़ती संख्या और सीमित संसाधनों की वजह से ऐसी स्थिति बनी, लेकिन अब हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद कार्रवाई तय मानी जा रही है। मुख्य न्यायाधीश ने आदेश में कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में इस तरह की अमानवीय घटनाएं दोबारा न हों और मरीजों को सम्मानजनक व सुरक्षित इलाज का अधिकार मिले।





