मतदाता सूची में भारी गड़बड़ी, रायपुर में लाखों नामों पर सवाल

रायपुर। रायपुर जिले की मतदाता सूची में सामने आई खामियों ने चुनावी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान जो तथ्य उजागर हुए, वे वर्षों से चली आ रही प्रशासनिक लापरवाही की तस्वीर पेश करते हैं। कहीं मतदाता सूची में दादा की उम्र पिता से कम दर्ज है, तो कहीं बेटे की उम्र पिता से ज्यादा दिखाई दे रही है। यह स्थिति सिर्फ तकनीकी गलती नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार है।

जांच में सामने आया कि करीब 2 लाख 15 हजार मतदाताओं के पिता के नाम और उम्र मतदाता सूची में दर्ज विवरण से मेल नहीं खाते। वहीं 6,040 मामलों में मतदाताओं की उम्र आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों से अलग पाई गई। इसके अलावा 57,709 मामलों में पिता का नाम ही गलत दर्ज मिला। विधानसभा वार आंकड़ों पर नजर डालें तो रायपुर ग्रामीण, धरसींवा, आरंग और अभनपुर जैसे क्षेत्रों में सबसे अधिक विसंगतियां सामने आई हैं।

इन गड़बड़ियों के बीच जिले की सात विधानसभा सीटों में अब तक 5 लाख 28 हजार मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा चुके हैं, जबकि 1 लाख 33 हजार मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। संशोधन प्रक्रिया के तहत फार्म-6 से 16,590 नए नाम जोड़े गए, फार्म-7 के जरिए 709 नाम हटाने के आवेदन आए और फार्म-8 से 6,968 प्रविष्टियों में सुधार किया गया। इसके बावजूद 5,11,136 मतदाताओं के नाम सूची से हटाया जाना चिंताजनक है।

चुनाव विभाग के अनुसार 22 जनवरी तक दावा-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। 14 फरवरी तक दस्तावेजों का सत्यापन होगा और 21 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा। जिन मतदाताओं के नाम हटे हैं, उन्हें दोबारा आवेदन कर नाम जुड़वाने का मौका दिया गया है।

मतदाता सूची की यह हालत बताती है कि सुधार की प्रक्रिया सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि गंभीर जिम्मेदारी के साथ लागू करने की जरूरत है, ताकि लोकतंत्र की नींव मजबूत रह सके।

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