जातीय जनगणना से पहले बनेगी जातियों की सूची, सभी दलों की सहमति जरूरी

दिल्ली। देश में आजादी के बाद पहली बार जातीय जनगणना की तैयारी हो रही है। इससे पहले केंद्र सरकार सभी जातियों की मान्य सूची तैयार करेगी, ताकि जनगणना में सुनियोजित और प्रमाणिक डेटा एकत्र किया जा सके।

इसके लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें राजनीतिक दलों की सहमति व सुझावों के आधार पर सूची को अंतिम रूप दिया जाएगा। अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की गिनती जनगणना में होती रही है, लेकिन OBC की जातियों को लेकर असमंजस की स्थिति है। 2011 में की गई सामाजिक-आर्थिक जनगणना में जातियों और उपजातियों की संख्या 46.73 लाख तक पहुंच गई थी, जिसे अविश्वसनीय माना गया।

1931 में हुई थी आखिरी जातीय गणना

देश में आखिरी बार 1931 में जातिगत जनगणना हुई थी, जिसमें 4,147 जातियां चिन्हित की गई थीं। मंडल कमीशन ने 1980 में यह अनुमान लगाया था कि देश में OBC की आबादी 52% है। 30 अप्रैल 2024 को केंद्रीय कैबिनेट ने जातीय जनगणना को मंजूरी दी। इसके लिए जनगणना एक्ट 1948 में संशोधन किया जाएगा ताकि OBC की 2,650 जातियों की गणना हो सके।

2011 की जनगणना अधूरी रही

2011 में की गई सामाजिक-आर्थिक जातीय जनगणना के आंकड़े कभी सार्वजनिक नहीं हुए। अब यह तय किया गया है कि अगली जनगणना में अतिरिक्त कॉलम जोड़े जाएंगे और जातिगत आधार पर विस्तृत आंकड़े दर्ज किए जाएंगे। जनगणना प्रक्रिया पूरी होने में 2026 के अंत तक का समय लग सकता है।

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