सेमरगांव में 2–4 अप्रैल तक लगेगा लिंगो देव करसाड़ जात्रा मेला, आदिवासी आस्था और संस्कृति का महापर्व

कांकेर। बस्तर की धरती अपनी अनोखी आदिवासी परंपराओं और प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली के लिए जानी जाती है, जहां जल, जंगल और जमीन केवल संसाधन नहीं बल्कि आस्था के केंद्र हैं। इसी आस्था के सबसे बड़े प्रतीक पाटा गुरु माने जाने वाले लिंगो देव का भव्य करसाड़ जात्रा मेला 2 से 4 अप्रैल तक सेमरगांव लिंगो धाम में आयोजित होगा।
सेमरगांव स्थित लिंगो धाम आदिवासी समाज के लिए पवित्र पेनस्थल माना जाता है। लिंगो देव को समाज का मार्गदर्शक, संरक्षक और गुरु माना जाता है। मान्यता है कि उन्होंने आदिवासी समाज को संगठित कर परंपराओं को संरक्षित किया और जीवन जीने की नई दिशा दी, इसलिए उन्हें देवता के साथ गुरु का दर्जा भी दिया जाता है।
करसाड़ जात्रा मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि आदिवासी संस्कृति का बड़ा संगम है। इस मेले में छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश और झारखंड सहित कई राज्यों से हजारों श्रद्धालु, देवी-देवताओं की डोलियां, आंगा, छतर और पारंपरिक प्रतीक शामिल होते हैं। करीब एक हजार से अधिक देव स्वरूपों की उपस्थिति इस आयोजन को देव सम्मेलन का स्वरूप देती है।
मेले के दौरान मांदर, ढोल और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक माहौल से भर देती है। श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य करते हुए अपने देवताओं के साथ यहां पहुंचते हैं। पूजा-अर्चना पूरी तरह पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार होती है, जिसका संचालन 14 भाइयों की पारंपरिक समिति करती है।
लिंगो देव से जुड़ी कई लोककथाएं भी प्रचलित हैं। लोगों का विश्वास है कि सच्चे मन से मांगी गई मन्नत पूरी होती है और संकट के समय लिंगो देव मार्ग दिखाते हैं। मेले के दौरान श्रद्धालुओं को विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है।
लिंगो देवगुड़ी में पूजा के लिए सख्त परंपराएं लागू हैं। देवस्थल में पुरुषों के लिए पारंपरिक वेशभूषा अनिवार्य है, शराब और अनुचित गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध रहता है, जबकि महिलाएं देवगुड़ी के भीतर प्रवेश नहीं कर सकतीं और दूर से दर्शन करती हैं। यह अनुशासन परंपरा की पवित्रता को बनाए रखता है।
यह आयोजन केवल आदिवासी समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि कलार, तेली, राउत सहित 12 अन्य समुदायों की भी भागीदारी होती है, जो सामाजिक समरसता का संदेश देता है। हर तीन साल में होने वाले इस करसाड़ जात्रा मेले में इस बार जिला प्रशासन भी सक्रिय रूप से शामिल हो रहा है ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

करसाड़ जात्रा की तैयारियों का जायजा लेने कांकेर लोकसभा सांसद भोजराज नाग भी सेमरगांव पहुंचे। उन्होंने व्यवस्थाओं की समीक्षा कर प्रशासन को जरूरी निर्देश दिए और बताया कि लिंगो देव समिति की ओर से प्रदेश के मुख्यमंत्री को भी आमंत्रित किया गया है, जिनके शामिल होने के संकेत मिल रहे हैं।
आधुनिकता के दौर में भी लिंगो देव का करसाड़ जात्रा मेला परंपरा, आस्था और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण बना हुआ है, जो बस्तर की समृद्ध संस्कृति को देश-दुनिया तक पहुंचाने का माध्यम बन रहा है।





