मध्य पूर्व में संतुलन की धुरी बना जॉर्डन, पीएम मोदी के दौरे से रणनीतिक रिश्तों को मजबूती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जॉर्डन दौरे ने पश्चिम एशिया की राजनीति में एक अहम संकेत दिया है। यह यात्रा ऐसे समय में हुई है, जब वैश्विक स्तर पर व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन को लेकर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। भारत इस दौरे के जरिए पश्चिम एशिया और अफ्रीका में अपने रणनीतिक रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
जॉर्डन की राजधानी अम्मान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की किंग अब्दुल्लाह द्वितीय और प्रधानमंत्री जफर हसन से मुलाकात को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खास महत्व दिया जा रहा है। जॉर्डन को पूरे मध्य पूर्व में एक अनोखी ताकत माना जाता है, क्योंकि उसने अरब देशों के साथ-साथ इजराइल और पश्चिमी देशों से भी संतुलित और मजबूत संबंध बनाए रखे हैं। ऐसे समय में भारत का जॉर्डन के साथ नजदीकी बढ़ाना यह दर्शाता है कि भारत क्षेत्रीय राजनीति में केवल पारंपरिक शक्तियों पर निर्भर नहीं रहना चाहता।
जॉर्डन की विदेश नीति उसे अन्य मध्य पूर्वी देशों से अलग बनाती है। जहां कई देश अमेरिका, सऊदी अरब या ईरान के प्रभाव क्षेत्र में नजर आते हैं, वहीं जॉर्डन ने सभी पक्षों के साथ संवाद और सहयोग का रास्ता अपनाया है। यही वजह है कि उसे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला देश माना जाता है।
जॉर्डन की भौगोलिक स्थिति भी उसे रणनीतिक रूप से बेहद अहम बनाती है। इसकी सीमाएं इराक, सीरिया, इजराइल और फिलिस्तीनी क्षेत्रों से लगती हैं, जिससे यह पूरे पश्चिम एशिया के लिए एक जियोपॉलिटिकल हब के रूप में उभरता है। किंग अब्दुल्लाह द्वितीय का हशेमाइट परिवार करीब 1400 वर्षों से शासन से जुड़ा रहा है और इसके ऐतिहासिक व धार्मिक प्रभाव को भी क्षेत्रीय राजनीति में अहम माना जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब भारत और जॉर्डन के राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस दौरान दोनों देशों ने भविष्य के सहयोग के लिए एक साझा दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। इसमें व्यापार और आर्थिक सहयोग, कृषि और उर्वरक, सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवाएं, बुनियादी ढांचा, रणनीतिक खनिज, नागरिक परमाणु सहयोग और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है।
भारत और जॉर्डन के बीच व्यापारिक रिश्ते पहले से ही मजबूत रहे हैं। भारत जॉर्डन का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वर्ष 2023-24 में दोनों देशों के बीच व्यापार करीब 2.875 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। भारत जॉर्डन को इलेक्ट्रिकल उत्पाद, अनाज, केमिकल, पेट्रोलियम और ऑटो पार्ट्स का निर्यात करता है, जबकि जॉर्डन से उर्वरक, फॉस्फेट और फॉस्फोरिक एसिड भारत आयात करता है। इसके अलावा भारतीय कंपनियों के कई प्रोजेक्ट जॉर्डन में संचालित हो रहे हैं।
प्रधानमंत्री के इस दौरे को भारत की पश्चिम एशिया नीति में एक अहम कदम माना जा रहा है, जिससे न केवल जॉर्डन के साथ रिश्ते और मजबूत होंगे, बल्कि पूरे अरब क्षेत्र में भारत की रणनीतिक पकड़ को भी नई मजबूती मिलेगी।





