जशपुर: जिला अधिवक्ता संघ के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने ली शपथ

जशपुर जिला व्यवहार न्यायालय में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को शपथ दिलाई और न्याय के प्रति समर्पण का संकल्प दिलाया। इस कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण हस्तियां भी मौजूद रहीं।
शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए ये लोग
समारोह में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंसूर अहमद, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जनार्दन खरे, विधायक गोमती साय और रायमुनी भगत सहित अन्य गणमान्य नागरिक शामिल हुए।
नवनिर्वाचित पदाधिकारी
शपथ लेने वालों में शामिल थे:
अध्यक्ष: ओम प्रकाश साय
वरिष्ठ उपाध्यक्ष: जनार्दन प्रसाद सिन्हा
कनिष्ठ उपाध्यक्ष: दीपिका कुजूर
सचिव: सत्य प्रकाश तिवारी
सह सचिव: सूरज चौरसिया
कोषाध्यक्ष: सुचेन्द्र कुमार सिंह
ग्रंथपाल: गोपाल प्रसाद रवानी
क्रीड़ा एवं सांस्कृतिक सचिव: सत्येन्द्र जोल्हे
मुख्यमंत्री ने दिए शुभकामनाएं और किया बड़ा ऐलान
मुख्यमंत्री साय ने सभी नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि न्यायपालिका लोकतंत्र की रीढ़ है और अधिवक्ताओं की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने अधिवक्ताओं से न्याय प्रक्रिया को तेज और सरल बनाने में योगदान देने की अपील की।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने बार काउंसिल के जीर्णोद्धार और ई-लाइब्रेरी निर्माण के लिए 1 करोड़ रुपये की घोषणा की। उन्होंने कहा कि ई-लाइब्रेरी से अधिवक्ताओं और कानून के छात्रों को आधुनिक संदर्भ सामग्री तक आसानी से पहुँच मिलेगी।
जशपुर अधिवक्ता संघ की ऐतिहासिक भूमिका
मुख्यमंत्री ने जशपुर जिला अधिवक्ता संघ की ऐतिहासिक भूमिका की तारीफ की और कहा कि यह संघ हमेशा से सामाजिक न्याय और विधिक सेवा में अग्रणी रहा है। उन्होंने महान अधिवक्ताओं जैसे भारतचंद काबरा, बालासाहेब देशपांडे और नरहरि साय का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने वंचित और पीड़ित लोगों को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
न्यायपालिका और अधिवक्ता संघ का अटूट रिश्ता
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंसूर अहमद ने कहा कि न्यायपालिका और अधिवक्ता संघ का रिश्ता बेहद मजबूत है। दोनों को मिलकर समाज में न्याय और विधि व्यवस्था को और भी मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने अधिवक्ताओं से न्याय की गरिमा बनाए रखने की अपील की।
वक्ताओं ने रखे अपने विचार
समारोह में अन्य वक्ताओं ने भी अधिवक्ताओं की समाज में भूमिका, विधिक सहायता की आवश्यकता और न्याय प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के उपायों पर अपने विचार साझा किए।





