जाम, गड्ढे और महंगा सफर: कुम्हारी टोल पर लोगों की दोहरी मार

दुर्ग। रायपुर के कुम्हारी टोल नाके से रोजाना करीब 45 हजार वाहन गुजरते हैं, जिनसे एनएचएआई औसतन 13 लाख रुपए प्रतिदिन, यानी सालाना लगभग 46.80 करोड़ रुपए वसूल रही है। यह वसूली टाटीबंध से भिलाई-नेहरू नगर के बीच 16 किमी सड़क के रखरखाव के नाम पर की जाती है।

2005 में इस सड़क को बीओटी मॉडल पर बनाया गया था और 2015 तक कंपनी ने टोल वसूला। इसके बाद एनएचएआई ने सड़क अपने अधीन लेकर टोल वसूली जारी रखी। टाटीबंध ओवरब्रिज पर खर्च हुए 100 करोड़ की भरपाई भी इसी टोल से की गई। हालांकि, टोल की मूल लागत 2015 में ही वसूल हो चुकी है। अब मरम्मत और नए प्रोजेक्ट के लिए पैसा लिया जा रहा है।

बायपास निर्माण के बाद भारी वाहनों का दबाव कम होगा, जिससे सड़क की उम्र बढ़ेगी। दुर्ग-आरंग बायपास का निर्माण दो कंपनियों—सेल कंस्ट्रक्शन और एसएमएस कंस्ट्रक्शन को सौंपा गया है, लेकिन भूमि अधिग्रहण में देरी से जुलाई 2025 की तय समयसीमा पर काम पूरा नहीं हो सका।

कुम्हारी टोल नाके के आसपास अक्सर जाम लगने से लोग परेशान रहते हैं। स्थानीय लोगों और रायपुरवासियों ने कई बार धरना-प्रदर्शन कर टोल हटाने की मांग की, पर अफसरों ने समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला।

एनएचएआई के अनुसार, कुम्हारी टोल का मौजूदा टेंडर अप्रैल 2026 में खत्म होगा। यदि बायपास समय पर तैयार नहीं हुआ, तो वसूली के लिए दो महीने का अतिरिक्त टेंडर जारी हो सकता है। तब तक प्रतिदिन करोड़ों का टैक्स वसूला जाता रहेगा, जो सीधे एनएचएआई के खाते में जमा होगा।

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