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indifference of railway management: रेलवे प्रबंधन की मनमानी, केवल AC कोच में ही फायर एक्जिस्टिंग सुविधा

बिलासपुर। भारत देश में प्रतिदिन सैकड़ों ट्रेनों का परिचालन होता है। वहीं सुरक्षा के दृष्टिकोण से रेलवे पर्याप्त उपाय करने का दावा करती है, लेकिन ट्रेनों में फायर एक्जिस्टिंग के नाम पर केवल एक कोच में ही सुविधा उपलब्ध होती है। जबकि जनरल और स्लीपर कोच में सुविधा नहीं होने से यात्री हमेशा चिंतित रहते हैं। प्रतिदिन भारतीय रेल से हजारों की संख्या में रेलयात्री एक स्थान से दूसरे स्थान तक यात्रा करते हैं।

इसके लिए रेलवे के द्वारा रेल कोच बनाए गए हैं, जिसमें यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं का पूरा ख्याल रखने की बात कही जाती है। लेकिन वास्तविकता में देखा जाए तो रेलवे का ज्यादा फोकस एसी कोच में यात्रा करने वाले रेल यात्रियों के प्रति होता है। अब अगर आप रेल में सफर कर रहे हो और किसी कारणवश ट्रेन के कोच में आग लग जाए तो एसी कोच में तो फायर एक्जिस्टिंग के नाम पर रेलवे सुविधा उपलब्ध करता है।

लेकिन स्लीपर और जनरल कोच में रेलवे के द्वारा आग लगने की स्थिति पर कोई बेहतर इंतजाम नहीं किए गए हैं। एसी कोच में जहां हर समय अटेंडर मौजूद रहता है तो स्लीपर और जनरल कोच में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं होती। वही देखा जाए तो सबसे ज्यादा भीड़ स्लीपर और जनरल कोच में ही होती है, लेकिन न जाने क्यों रेलवे केवल औपचारिकता के नाम पर इन दोनों कोच में खाना पूर्ति के नाम पर फायर एक्जिस्टिंग तो लगता है।

लेकिन इसकी देखरेख करने वाला कोई नहीं होता जबकि एसी कोच में लगातार इन फायर एक्जिस्टिंग की मॉनिटरिंग होती है रेलवे के अधिकारियों की माने तो ट्रेनों में फायर एक्जिस्टिंग के पर्याप्त उपाय किए गए हैं। तो वही समय-समय पर इसकी मॉनीटरिंग भी होती है। जिससे आग लगने की स्थिति पर समय रहते नियंत्रण पाया जा सकता है। वहीं यात्रियों की भी मन तो रेलवे को सुरक्षा उपकरणों के पर्याप्त इंतजाम करने चाहिए ताकि यात्रियों में भाई की स्थिति निर्मित ना हो।

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