रायपुर साहित्य उत्सव में गूंजा ‘भारत का बौद्धिक विमर्श’, राम माधव ने कहा-विचार ही राष्ट्र की असली ताकत

रायपुर। रायपुर साहित्य उत्सव ने एक बार फिर साबित कर दिया कि छत्तीसगढ़ सिर्फ सांस्कृतिक ही नहीं, बल्कि बौद्धिक रूप से भी समृद्ध भूमि है। उत्सव के दौरान आयोजित विशेष सत्र ‘भारत का बौद्धिक विमर्श’ ने श्रोताओं का खास ध्यान खींचा। इस सत्र के मुख्य वक्ता प्रख्यात विचारक और लेखक श्री राम माधव रहे।

अपने संबोधन में राम माधव ने कहा कि किसी भी देश को जीवंत और मजबूत बनाए रखने में उसके विचारों की सबसे बड़ी भूमिका होती है। उन्होंने बताया कि भारत की बौद्धिक परंपरा बहुत पुरानी, गहरी और तार्किक रही है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। उन्होंने इस सोच को भी चुनौती दी कि बौद्धिकता केवल पश्चिमी देशों तक सीमित है।

राम माधव ने कहा कि भारत का चिंतन ‘वसुधैव कुटुंबकम’ जैसे मूल्यों के साथ आधुनिक विज्ञान, राजनीति और वैश्विक परिस्थितियों को समझने की क्षमता भी रखता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी जड़ों को समझते हुए नए विचारों के लिए खुले रहें।

सत्र के दौरान श्रोताओं और युवाओं ने भी सवाल पूछे और अपने विचार रखे, जिससे पूरा माहौल सार्थक संवाद में बदल गया। कार्यक्रम के अंत में यह संदेश साफ तौर पर उभरा कि असहमति भी तभी उपयोगी होती है, जब वह तर्क और मर्यादा के साथ हो।

यह सत्र केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सकारात्मक सोच और आत्मबोध से जुड़े नए बौद्धिक संवाद की मिसाल बन गया। रायपुर साहित्य उत्सव ने यह दिखा दिया कि छत्तीसगढ़ की धरती पर लोक संस्कृति के साथ-साथ गहन वैचारिक मंथन की भी मजबूत परंपरा मौजूद है।

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