स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की ओर बढ़ रहा है भारत: जेपी नड्डा

नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने राज्यसभा में कहा कि सरकार का स्वास्थ्य सेवा पर खर्च धीरे-धीरे GDP के 2.5 प्रतिशत के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि 2013-14 में स्वास्थ्य सेवा के लिए बजट 38,000 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 99,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। उनका दावा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा नीतिगत परिवर्तन हुआ है, जिसका दूरगामी प्रभाव देखने को मिलेगा।

जेपी नड्डा ने राज्यसभा में कहा कि 2013-14 में सरकारी स्वास्थ्य व्यय GDP का 1.15 प्रतिशत था। जब 2017 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति लागू की गई थी, तब यह बढ़कर 1.35 प्रतिशत हुआ। वर्तमान में यह GDP का 1.84 प्रतिशत हो चुका है और सरकार इसे 2.5 प्रतिशत तक ले जाने की कोशिश कर रही है। नीति के अनुसार, 2025 तक सरकारी स्वास्थ्य व्यय को GDP के हिस्से के रूप में 2.5 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

नए मेडिकल कॉलेज और एम्स का निर्माण

जेपी नड्डा ने जानकारी दी कि 2014 से 2025 के बीच कुल 22 एम्स (AIIMS) बनाए गए हैं, जबकि 2004 से 2014 के बीच यूपीए सरकार के 10 साल के कार्यकाल में सिर्फ एक एम्स रायबरेली में खोला गया था। इससे पहले अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने अपने कार्यकाल में 6 एम्स खोले थे। नड्डा ने यह भी बताया कि देशभर में नए सरकारी मेडिकल कॉलेज भी खोले जा रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ोतरी हो रही है।

आयुष्मान आरोग्य मंदिर की पहल

जेपी नड्डा ने कहा कि देशभर में लगभग 1.75 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर बनाए गए हैं, जो रोगियों के पहले संपर्क बिंदु के रूप में काम कर रहे हैं। इन केंद्रों में राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानकों (NQAS) को भी लागू किया गया है।

कुपोषण पर चिंता और समाधान

कुपोषण की स्थिति को लेकर नड्डा ने चिंता जाहिर की और बताया कि सरकार सभी मंत्रालयों के साथ मिलकर इसके समाधान की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पहले एलोपैथी, आयुर्वेदिक और होम्योपैथी के बीच झगड़े होते थे, लेकिन अब सभी चिकित्सा पद्धतियां एक छत के नीचे काम कर रही हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद

जेपी नड्डा ने कहा कि भारत अब टीवी मुक्त होने की दिशा में बढ़ रहा है। इसके अलावा, पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु केंद्र के बाद जम्मू, बेंगलुरु, डिब्रूगढ़ और जबलपुर में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) खोले जा रहे हैं। देश में इस समय 15,000 जन औषधि केंद्र हैं और अगले दो सालों में इनकी संख्या 25,000 तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

सरकार की इन पहलों से स्पष्ट है कि आने वाले समय में देश की स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।

 

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