डिफेंस प्रोडक्शन में भारत की ऐतिहासिक छलांग, रिकॉर्ड उत्पादन के साथ बढ़ा निर्यात और घटा आयात

दिल्ली। दिल्ली। भारत ने रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए वित्त वर्ष 2024-25 में 1.54 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड रक्षा उत्पादन दर्ज किया है। यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है, जो देश की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी छलांग माना जा रहा है। यह उपलब्धि केंद्र सरकार की “आत्मनिर्भर भारत” पहल की सफलता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है, जिसके तहत स्वदेशी तकनीक, घरेलू उद्योग और निजी क्षेत्र को रक्षा उत्पादन में मजबूत किया गया है।
सरकार द्वारा लागू रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP-2020) और रक्षा खरीद नियमावली (DPM-2025) ने खरीद प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और नवाचार-समर्थ बनाया है। इसके परिणामस्वरूप अब करीब 65 प्रतिशत रक्षा उपकरण देश में ही निर्मित किए जा रहे हैं, जिससे आयात पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आई है। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में स्थापित रक्षा औद्योगिक गलियारों ने इस क्षेत्र को नई गति दी है, जहां अब तक 9,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित किया जा चुका है। इसके साथ ही 16,000 से अधिक एमएसएमई और कई स्टार्टअप रक्षा उत्पादन से जुड़े हैं, जिससे रोजगार और तकनीकी विकास दोनों को बल मिला है।
रक्षा निर्यात के मोर्चे पर भी भारत ने तेज प्रगति की है। निर्यात प्रक्रियाओं को सरल बनाने, डिजिटल सिस्टम लागू करने और ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस (OGEL) जैसे कदमों से वित्त वर्ष 2024-25 में रक्षा निर्यात बढ़कर 23,622 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12 प्रतिशत अधिक है। आज भारत दुनिया के कई देशों को हथियार, गोला-बारूद, रडार, मिसाइल सिस्टम और रक्षा तकनीक निर्यात कर रहा है।
इसके साथ ही भारत ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष तकनीक और उन्नत युद्ध प्रणालियों के स्वदेशी विकास पर विशेष जोर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ऐतिहासिक वृद्धि भारत को न केवल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि उसे वैश्विक रक्षा निर्यातक देशों की अग्रिम पंक्ति में भी खड़ा करेगी।





