परिवार के साथ घुमने का प्लान बना रहे हैं, रायपुर के पास जरुर जाएं ये जगहें

रायपुर। धार्मिक पर्यटन स्थल घूमने का मन बना रहे हैं तो चंपारण बेस्ट है। महानदी के तट पर बने मंदिर आपको वृंदावन जैसी अनुभूति कराएगा। सभी मंदिर वृंदावन की तर्ज पर बनाए गए हैं। यह स्थान महाप्रभु श्रीवल्लाभाचार्य की जन्मस्थली है।  राजधानी से लगभग 45 किमी की दूरी तय कर सड़क मार्ग से चंपारण पहुंच सकते हैं। यहाँ चंपेश्वर महादेव मंदिर, राम जानकी मंदिर समेत 100 से अधिक चित्रों की प्रदर्शनी देख सकते हैं। इसे छत्तीसगढ़ का वृन्दावन भी कहा जाता है।

 

कम रेंज में आप बलौदाबाजार जिले के तुरतुरिया में बाल्मिकी आश्रम भी जा सकते हैं। तुरतुरिया लव कुश की जन्म स्थली है। यह बारनवापारा अभयारण्य से लगा हुआ है। यह स्थान चारों तरफ हरियाली देने वाला और पहाड़ों से घिरा हुआ आश्रम है। रायपुर से तुरतुरिया की दूरी लगभग 85 किमी है। इसी स्थान पर भगवान राम और माता सीता के पुत्र लव और कुश ने जन्म लिया था।

 

वेकेशन में सैर सपाटे के लिए आप राजिम का भी प्लान बना सकते हैं। यहां महानदी, पैरी और सोंढुर नदी का संगम है, इसे छत्तीसगढ़ का ‘प्रयाग’ कहा जाता है। संगम के बीच में कुलेश्वर महादेव का मंदिर है। यहां त्रिवेणी नदी का संगम आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। रायपुर से राजीव लोचन मंदिर की दूरी 45 किमी की है। इसे छत्तीसगढ़ का प्रयागराज भी कहा जाता है, क्योंकि यहां हर साल माघ पूर्णिमा में विशालकाय मेला लगता है, जहां देशभर के साधू संत डुबकी लगाने आते हैं।

 

पल को यादगार बनाने के लिए हर कोई हरियाली और पहाड़ों के बीच जाना चाहता है। ऐसे में जतमई-घटारानी की बात न हो तो ऐसा हो ही नहीं सकता। पहाड़ों से गिरती झरना अपनी प्राकृतिक सुंदरता की छटा बिखेरता है। हर साल यहां हजारों सैलानी आते हैं। यह पिकनिक स्पॉट गरियाबंद जिले में स्थित हैं। यह रायपुर से 77 किमी की दूरी पर स्थित है। यहां पहाड़ी से गिरता नेचुरल वाटरफॉल लोगों के बीच आकर्षण का केन्द्र है।

 

एशिया महाद्वीप का सबसे बड़ा मानव निर्मित जंगल सफारी रायपुर में स्थित है। ऐसे में आप रायपुर से हैं तो बहुत लक्की है। जंगल सफारी घूमने का प्लान बनाकर अपने वेकेशन को खास बना सकते हैं। जंगल सफारी नया रायपुर में स्थित हैं। यहां अभयारण्य की तर्ज पर जंगली जानवर खुले में रहते हैं। राजधानी रायपुर से इसकी दूरी महज 25 किमी है।

 

आप रायपुर से हैं तो एक बार चंदखुरी जरूर जाएं। भगवान राम की माता कौशल्या की जन्म स्थली है। तालाब के बीचों-बीच माता कौशल्या का मंदिर बना हुआ है। यह मंदिर हसौद के चंदखुरी फॉर्म के पास स्थित हैं। जहां सैलानियों के आने की संख्या दिन के दिन लगातार बढ़ते जा रही हैं। यहां आपको माता कौशल्या के बारे में जानने को मिलेगा। राजधानी रायपुर से 27 किलोमीटर दुरी पर स्थित हैं।

 

छत्तीसगढ़ में कई धार्मिक पर्यटन स्थल है, वहीं कम खर्च में आप ऍन्जाय करना चाहते हैं तो बालोद में स्थित सियादेवी मंदिर जा सकते हैं। मंदिर प्राकृतिक सुंदरता से घिरा हुआ है। घने जंगल, पहाड़ों और झरनों के बीच यह स्थान बहुत सुन्दर हैं। यह मंदिर झोलबाहरा और तुमनाला का संगम स्थल हैं। यहां जलधारा एक प्राकृतिक झरने के रूप में गिरती हैं। इस झरने की ऊंचाई 50 फीट हैं। रायपुर से बालोद और सांकरा मार्ग जाने के बाद 25 कि मी की दुरी पर नारागांव पहाड़ी पर सियादेवी मंदिर स्थित है।

 

कम खर्चे में आप गोवा का मजा लेने की सोच रहे हैं तो धमतरी के गंगरेल बांध घूमने की सलाह देंगे। जिस तरह लोग पानी में मोटरबोट का आनंद लेते हैं ठीक उसी तरह की मस्ती बांध के किनारे कर सकते हैं। गोवा की तर्ज पर रिसॉर्ट बनाया गया हैं। इसलिए इसे मिनी गोवा भी कहा जाता है। यहां घूमने के साथ-साथ आप वाटर स्पोर्ट्स का भी आनंद उठा सकते हैं। रायपुर से धमतरी पहुंचने के बाद आप गंगरेल बांध पहुंचे सकते हैं। सड़क मार्ग से इसकी दूरी लगभग 80 किमी दूर है।

 

आप सिमगा के लखना गांव भी जा सकते हैं। यहां लगभग 6-7 वीं शताब्दी के प्राचीन शिवमंदिर है। रंग बदलने के साथ ही स्वयं-भू शिवलिंग का आकार लगातार बढ़ते जा रहा है। इसे सोमनाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है। खारून और शिवनाथ नदी का यह संगम स्थल है।  राजधानी से लगभग 45 किमी की दूरी तय कर सड़क मार्ग से सोमनाथ मंदिर पहुंच सकते हैं। धार्मिक स्थल होने के साथ-साथ नदी के तट पर आप प्राकृतिक स्थल का शानदार दृश्य का अनुभव भी ले सकते हैं।

 

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