छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम फैसला: बिना उचित कारण अलग रहने पर पत्नी को नहीं मिलेगा भरण-पोषण

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि यदि पत्नी बिना किसी वैध और पर्याप्त कारण के पति और ससुराल से अलग रह रही है, तो वह मासिक भरण-पोषण की हकदार नहीं होगी।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की सिंगल बेंच ने यह फैसला बिलासपुर निवासी प्रवीण कुमार वेदुला के मामले में सुनाया। पत्नी ने परिवार न्यायालय द्वारा भरण-पोषण से इंकार किए जाने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया।

कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां

•परिवार न्यायालय के आदेश में कोई अवैधता या त्रुटि नहीं पाई गई।

•वैवाहिक विवादों में केवल संबंध नहीं, बल्कि दोनों पक्षों का आचरण भी महत्वपूर्ण होता है।

•पति ने विवाह बचाने के लिए प्रयास किए और दांपत्य पुनर्स्थापना की याचिका भी दायर की।

कोर्ट ने कहा कि जब पति ने Hindu Marriage Act, 1955 की धारा 9 के तहत वैवाहिक अधिकारों की बहाली (Restitution of Conjugal Rights) के लिए याचिका दायर की, तब पत्नी के पास वैवाहिक जीवन दोबारा शुरू करने का अवसर था। लेकिन पत्नी साथ रहने को तैयार नहीं हुई।

क्या है पूरा मामला?

प्रवीण कुमार वेदुला का विवाह 10 फरवरी 2019 को बिलासपुर में हुआ था। विवाह के कुछ समय बाद पत्नी ने दहेज प्रताड़ना के आरोप लगाए।

19 अक्टूबर 2020 को महिला थाना बिलासपुर में एफआईआर दर्ज कराई गई, जिसमें कार और 10 लाख रुपये की मांग तथा मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न के आरोप लगाए गए। हालांकि, पुलिस कार्रवाई के बाद मामला न्यायालय पहुंचा, जहां 19 मार्च 2021 को याचिका खारिज कर दी गई। बाद में सत्र न्यायालय ने भी पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी।

अदालत ने माना कि पति ने वैवाहिक जीवन बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया, लेकिन पत्नी ने साथ रहने से इनकार किया। ऐसे में भरण-पोषण का दावा स्वीकार्य नहीं है।

यह फैसला वैवाहिक मामलों में ‘आचरण’ की अहमियत को रेखांकित करता है और बताता है कि भरण-पोषण का अधिकार परिस्थितियों और तथ्यों पर निर्भर करता है।

Show More
Follow Us on Our Social Media
Back to top button
जम्मू-कश्मीर में बारिश से अपडेट सोनम ने ही राजा को दिया था खाई में धक्का… आरोपियों ने बताई सच्चाई
जम्मू-कश्मीर में बारिश से अपडेट सोनम ने ही राजा को दिया था खाई में धक्का… आरोपियों ने बताई सच्चाई