बकाया बिजली बिल पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, नए मालिक को करना होगा पुराना बकाया भुगतान

बिलासपुर। बकाया बिजली बिल की वसूली को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने स्पष्ट किया है कि नीलामी में खरीदी गई संपत्ति के नए मालिक को पुराने मालिक का बकाया बिजली बिल चुकाना ही होगा। कोर्ट ने इसे कानूनन सही और वैधानिक प्रक्रिया बताया है।
मामला पॉलीबॉन्ड रॉक फाइबर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। कंपनी ने बैंक नीलामी के जरिए एक बंद प्लांट खरीदा था। यह प्लांट पहले अरिहंत रॉक वूल फाइबर प्राइवेट लिमिटेड का था, जिसने बैंक ऑफ इंडिया से कर्ज लिया था। कर्ज नहीं चुकाने पर बैंक ने संपत्ति जब्त कर 19 अप्रैल 2012 को नीलामी की थी। नीलामी में पॉलीबॉन्ड कंपनी ने 2 करोड़ 62 लाख रुपए में यह संपत्ति खरीदी।
बाद में जब कंपनी ने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी (CSPDCL) से नया बिजली कनेक्शन मांगा, तो पता चला कि पुराने मालिक पर वर्ष 2008 से करीब 17.67 लाख रुपए का बिजली बिल बकाया है। बिजली कंपनी ने यह राशि जमा करने के बाद ही कनेक्शन देने की शर्त रखी। मजबूरी में कंपनी ने रकम जमा कर दी और बाद में उसे वापस दिलाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
याचिकाकर्ता का कहना था कि नीलामी के समय बैंक ने बकाया बिजली बिल की जानकारी नहीं दी और बिक्री प्रमाण पत्र में लिखा था कि संपत्ति सभी भारों से मुक्त है। इसलिए वह पुराने बिल के भुगतान के लिए जिम्मेदार नहीं है।
वहीं बिजली कंपनी और बैंक की ओर से कहा गया कि नीलामी “जैसी है, जहां है” आधार पर हुई थी। इसका मतलब है कि संपत्ति के साथ सभी बकाया और दायित्व भी नए खरीदार को मिलते हैं। खरीदार की जिम्मेदारी होती है कि वह पहले सभी बकाया की जानकारी ले।
हाईकोर्ट ने बिजली कंपनी और बैंक के तर्कों से सहमति जताई। कोर्ट ने कहा कि “जैसा है, जहां है” के आधार पर खरीदी गई संपत्ति में मौजूद सभी बकाया नए मालिक पर लागू होते हैं। विद्युत (प्रदाय) अधिनियम, 1948 की धारा 49 के तहत नए मालिक को बिजली कनेक्शन देने से पहले पुराने मालिक का पूरा बकाया चुकाना जरूरी है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर परिसर में बिजली कनेक्शन कटा हुआ था, तो समझदार खरीदार को इसकी वजह जांचनी चाहिए थी। ऐसे में बकाया की जानकारी न होने का तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता।
इन सभी कारणों से हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और बिजली कंपनी द्वारा की गई बकाया वसूली को सही ठहराया।





