मेडिकल पीजी एडमिशन कोटा संशोधन पर हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार से दो दिन में जवाब तलब

बिलासपुर। मेडिकल पीजी (पोस्ट ग्रेजुएट) एडमिशन के कोटे में किए गए बदलाव को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से दो दिनों के भीतर जवाब देने को कहा है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी की कि कोटा व्यवस्था पहले निजी कॉलेजों के लिए थी, फिर उसे शासकीय (सरकारी) कॉलेजों में क्यों लागू किया गया और किस आधार पर यह फैसला लिया गया। कोर्ट ने कहा कि ऐसा करना गलत प्रतीत होता है और जरूरत पड़ी तो पीजी एडमिशन की प्रक्रिया पर रोक भी लगाई जा सकती है।
मामले में चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से महाधिवक्ता ने पक्ष रखा। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 16 दिसंबर तय की है और तब तक सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है।
एमबीबीएस छात्रों की ओर से सतीश चंद वर्मा ने कोर्ट में पक्ष रखा। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस मामले में जो भी अंतिम फैसला आएगा, वह पहले से किए गए एडमिशन पर भी लागू होगा। उन्होंने आशंका जताई कि ओपन कोटा से एडमिशन लेने वाले छात्रों का प्रवेश रद्द हो सकता है।
याचिकाकर्ताओं ने कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन से भी अपील की है कि विवाद से बचने के लिए किसी प्रकार की मेरिट लिस्ट जारी न की जाए, जब तक अदालत का अंतिम फैसला नहीं आ जाता।





