कोडीन कफ सिरप मामले में हाई कोर्ट सख्त, आरोपियों को गिरफ्तारी से राहत नहीं

उत्तर प्रदेश के चर्चित कोडीन कफ सिरप कांड में आरोपियों को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए किसी तरह की राहत नहीं दी जा सकती।
शुभम जायसवाल समेत अन्य आरोपियों की ओर से दाखिल याचिका में गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई पर रोक की मांग की गई थी, लेकिन हाई कोर्ट ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जांच के दौरान सामने आए तथ्यों से मामला संगीन प्रतीत होता है, इसलिए हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है।
जांच एजेंसियों के अनुसार कोडीन कफ सिरप तस्करी के इस मामले में एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। शुभम जायसवाल को इस रैकेट का मुख्य आरोपी बताया जा रहा है, जो फिलहाल भारत से फरार है और उसके दुबई में होने की जानकारी सामने आई है। इससे पहले उसका एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें उसने खुद को निर्दोष बताया था।
इस मामले में वाराणसी, सोनभद्र, गाजियाबाद, जौनपुर, बस्ती और कानपुर नगर सहित कई जिलों में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और अलग-अलग शहरों से बड़ी मात्रा में कोडीन कफ सिरप भी बरामद की गई है। जांच एजेंसियां लगातार छापेमारी कर रही हैं।
मामले के तूल पकड़ने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने इसकी जांच के लिए विशेष जांच टीम का गठन किया है। इसके साथ ही प्रवर्तन निदेशालय की भी एंट्री हो चुकी है, जो इस रैकेट से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच कर रहा है।
कोडीन कफ सिरप कांड को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी विधानसभा में बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि नशे और तस्करी के लिए कफ सिरप के दुरुपयोग की शिकायतों के बाद सरकार ने सख्त कार्रवाई शुरू की। मुख्यमंत्री के बयान के बाद यह मामला सियासी बहस का भी विषय बन गया है।
हाई कोर्ट के ताजा फैसले के बाद साफ हो गया है कि फिलहाल आरोपियों को किसी तरह की कानूनी राहत नहीं मिलेगी और जांच व कार्रवाई जारी रहेगी।





