राज्य सूचना आयुक्त चयन प्रक्रिया पर हाईकोर्ट की रोक
चयन के बीच बदली गई अनुभव शर्त को कोर्ट ने माना अनुचित

रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सूचना आयुक्त के दो पदों के लिए चल रही चयन प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने यह आदेश चयन प्रक्रिया के बीच में सरकार द्वारा 25 वर्ष के कार्य अनुभव की नई शर्त जोड़ने को अनुचित ठहराते हुए दिया। हाईकोर्ट के जस्टिस संजय जायसवाल की सिंगल बेंच ने इस मामले में अगली सुनवाई 9 जून को तय की है।
राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने 4 मार्च को राज्य सूचना आयुक्त पद हेतु अधिसूचना जारी की थी। इसके अनुसार, 19 मार्च तक आवेदन आमंत्रित किए गए थे। उस समय किसी अनुभव की अनिवार्यता का उल्लेख नहीं था। कुल 231 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 172 आवेदक पात्र माने गए।
चयन के पहले जोड़ी गई अनुभव की नई शर्त
9 मई को एक पत्र जारी कर सरकार ने 25 वर्ष का कार्य अनुभव अनिवार्य कर दिया। यह अनुभव विधि, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, समाज सेवा, प्रबंधन, पत्रकारिता, जनसंपर्क या प्रशासन जैसे क्षेत्रों में होना चाहिए था। इस बदलाव के बाद केवल 51 आवेदक ही पात्र बचे, जिनका इंटरव्यू 28 मई को हुआ।
तीन याचिकाकर्ताओं ने दी चुनौती
इस अचानक हुए बदलाव को लेकर अनिल तिवारी, डीके सोनी और राजेंद्र उपाध्याय ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ताओं शरद मिश्रा, प्रसुन्न अग्रवाल और सिद्धार्थ तिवारी ने दलील दी कि प्रक्रिया के बीच में नियम बदलना सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के खिलाफ है।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद आदेश दिया कि चयन प्रक्रिया पर रोक रहेगी और परिणाम भी घोषित नहीं किया जाएगा। अब 9 जून को होने वाली अगली सुनवाई में आगे की दिशा तय होगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह रोक न्याय की प्रक्रिया और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।





