रिटायरमेंट के छह माह बाद GPF से वसूली पर रोक, हाईकोर्ट ने रिटायर्ड लेक्चरर को दी राहत

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी भी शासकीय कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने के छह महीने बाद सामान्य भविष्य निधि (GPF) की राशि से वसूली करना कानूनन गलत है। इसी आधार पर न्यायालय ने एक रिटायर्ड लेक्चरर के खिलाफ जारी वसूली आदेश को निरस्त कर दिया है।
मामला जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ निवासी लक्ष्मीनारायण तिवारी से जुड़ा है, जो शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ससहा में व्याख्याता के पद पर कार्यरत थे। वे 31 जनवरी 2011 को सेवानिवृत्त हुए थे।
सेवानिवृत्ति के करीब 12 साल बाद महालेखाकार कार्यालय रायपुर द्वारा उनके GPF खाते में ऋणात्मक शेष दर्शाते हुए वसूली आदेश जारी किया गया था। इससे परेशान होकर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस आदेश को चुनौती दी।
याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि पूर्व के न्यायिक फैसलों में यह स्पष्ट किया जा चुका है कि रिटायरमेंट के छह माह के भीतर ही किसी भी प्रकार की वसूली की जा सकती है। इसके बाद की गई वसूली नियमों के विरुद्ध मानी जाती है।
कोर्ट के समक्ष छत्तीसगढ़ सिविल सेवा पेंशन नियम, 1976 के नियम 65 का हवाला भी दिया गया, जिसमें निर्धारित किया गया है कि GPF खाते में ऋणात्मक शेष होने पर केवल छह माह की अवधि के भीतर ही वसूली संभव है।
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने माना कि 12 वर्ष बाद जारी किया गया वसूली आदेश विधि के विपरीत है। इसके चलते न्यायालय ने महालेखाकार कार्यालय द्वारा जारी आदेश को निरस्त कर दिया और याचिकाकर्ता को राहत प्रदान की।
इस फैसले से अन्य सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, जिनके खिलाफ लंबे समय बाद वसूली की कार्रवाई की जाती है।





