RTE को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार सख्त, निजी स्कूलों ने बच्चों को प्रवेश नहीं दिया तो मान्यता होगी रद्द

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने साफ चेतावनी दी है कि RTE के तहत बच्चों को प्रवेश नहीं देने वाले निजी स्कूलों की मान्यता रद्द कर दी जाएगी।
दरअसल, प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने प्रतिपूर्ति राशि नहीं बढ़ाने पर RTE के तहत बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश नहीं देने का ऐलान किया था, जिसके बाद राज्य सरकार ने कड़ा फैसला लिया है।
प्रदेश के गैर-अनुदान प्राप्त निजी विद्यालयों में RTE के तहत प्रारंभिक कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), दुर्बल वर्ग और वंचित समूह के बच्चों के लिए आरक्षित हैं। इन बच्चों को उनके निवास क्षेत्र के भीतर स्कूलों में प्रवेश दिया जाता है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ में दी जाने वाली शुल्क प्रतिपूर्ति राशि कई राज्यों के मुकाबले बेहतर या उनके बराबर है। कक्षा 1 से 5 तक 7 हजार रुपए और कक्षा 6 से 8 तक 11 हजार 400 रुपए प्रतिवर्ष दिए जा रहे हैं।
तुलनात्मक रूप से मध्य प्रदेश में 4,419 रुपए, बिहार में 6,569 रुपए, झारखंड में 5,100 रुपए और उत्तर प्रदेश में 5,400 रुपए प्रतिवर्ष प्रतिपूर्ति दी जाती है। सरकार का कहना है कि समग्र रूप से छत्तीसगढ़ की राशि संतुलित और उचित है।
वर्तमान में प्रदेश के 6,862 निजी स्कूलों में RTE के माध्यम से करीब 3 लाख 63 हजार 515 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। इस वर्ष कक्षा पहली की लगभग 22 हजार सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया जारी है।
राज्य सरकार ने कहा है कि सभी निजी स्कूलों को RTE कानून के तहत ही मान्यता दी गई है, इसलिए तय सीटों पर प्रवेश देना उनकी वैधानिक जिम्मेदारी है। अगर कोई स्कूल प्रवेश देने से इंकार करता है या प्रक्रिया में बाधा डालता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें मान्यता समाप्त करने तक का प्रावधान शामिल है।
शिक्षा विभाग ने लोगों से अपील की है कि RTE को लेकर फैलाई जा रही किसी भी भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें





