मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को राहत, सरोगेट मां–एकल पुरुष को भी मिलेगा चाइल्ड केयर लीव, 365 दिन तक पूरा वेतन

मध्य प्रदेश सरकार ने लगभग पाँच दशक पुराने सिविल सेवा अवकाश नियम 1977 में बड़ा संशोधन करते हुए सरकारी कर्मचारियों के लिए छुट्टी और वेतन से जुड़े कई अहम प्रावधानों को नई शक्ल दी है। अब सरोगेट या कमीशनिंग मां और अकेले (एकल) पुरुष शासकीय सेवक भी संतान पालन अवकाश के पात्र होंगे। दत्तक संतान ग्रहण करने पर सरकारी सेवक को 15 दिन का पितृत्व अवकाश मिलेगा। शिक्षकों को प्रतिवर्ष 10 अर्जित अवकाश और सेवानिवृत्ति के बाद बचे हुए अर्जित अवकाश के नकदीकरण की सुविधा भी दी जाएगी। ये संशोधित नियम 1 जनवरी 2026 से लागू होंगे।

सरकार के इस फैसले से प्रदेश के करीब 7.50 लाख नियमित कर्मचारी और कुल 7.50 लाख (लगभग 7.50 लाख) सरकारी कर्मियों को सीधा लाभ मिलेगा। नए नियमों के अनुसार, चाइल्ड केयर लीव के पहले 365 दिन पूर्ण वेतन के साथ मिलेंगे, जबकि दूसरी बार यही अवकाश लेने पर 80% वेतन का भुगतान किया जाएगा। कर्मचारी 18 वर्ष तक की आयु के बच्चे की देखभाल के लिए इस अवकाश का उपयोग कर सकेंगे। संशोधित प्रावधानों में अब तक के विपरीत वेतन कटौती की व्यवस्था शामिल की गई है। इसके तहत एक वर्ष में 3 बार से अधिक CCL स्वीकृत नहीं होगा, जबकि एकल महिला कर्मचारी को एक कैलेंडर वर्ष में 6 बार यह अवकाश लेने की पात्रता दी गई है।

दत्तक संतान अवकाश उस मां को नहीं मिलेगा, जिसने दत्तक लेते समय पहले से एक से अधिक जीवित संतान रखी हो। वहीं, पितृत्व अवकाश पत्नी के प्रसव की संभावित तिथि से 15 दिन पहले या प्रसव के 6 महीने के भीतर 15 दिनों के लिए लिया जा सकेगा और इस दौरान वेतन का भुगतान किया जाएगा। सरोगेसी से जन्मे बच्चे के कमीशनिंग पिता (सरोगेसी के माध्यम से बने पिता) भी 6 महीने के भीतर 15 दिनों के पितृत्व अवकाश के पात्र होंगे। इसके अलावा, मेडिकल क्षेत्र में कार्यरत चिकित्सकों को पीजी योग्यता हासिल करने के लिए 36 महीनों का अध्ययन अवकाश दिया जाएगा, जिससे राज्य के खजाने पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं आएगा।

हालांकि, यह अवकाश नियम कुछ श्रेणियों पर लागू नहीं होंगे, जिनमें आकस्मिक, दैनिक वेतनभोगी, अंशकालीन, संविदा, कार्यभारित स्थापना, आकस्मिक निधि से वेतन पाने वाले तथा अनियमित कर्मचारी शामिल हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अर्जित अवकाश की अधिकतम सीमा सेवाकाल में 300 दिनों से अधिक नहीं होगी और असाधारण अवकाश पर रहने वाले कर्मी किसी भी प्रकार के अवकाश वेतन के पात्र नहीं होंगे।

प्रशासनिक विशेषज्ञों की मानें तो यह संशोधन सरकारी सेवकों की बदलती पारिवारिक जरूरतों, कार्य–जीवन संतुलन और संवेदनशील श्रेणियों को समान अवसर देने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो आने वाले समय में कर्मचारियों के लिए एक मानक अवकाश नीति का रूप ले सकता है।

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