CG में गैस का ‘महायुद्ध’: कमर्शियल सिलेंडर की किल्लत से उज्ज्वला की मांग 25% बढ़ी; OTP और सॉफ्टवेयर ने बढ़ाई मुसीबत

रायपुर। छत्तीसगढ़ में एलपीजी सिलेंडर का संकट गहराता जा रहा है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण कमर्शियल गैस की सप्लाई क्या कम हुई, प्रदेश में घरेलू गैस के लिए हाहाकार मच गया है। हालात यह हैं कि पिछले 10 दिनों के भीतर छत्तीसगढ़ में 9 लाख से ज्यादा अतिरिक्त उज्ज्वला उपभोक्ताओं ने सिलेंडर रिफिल कराया है, जिससे एजेंसियों पर भारी भीड़ उमड़ रही है।

उज्ज्वला रिफिलिंग में 47% का उछाल

खाद्य विभाग के चौंकाने वाले आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में उज्ज्वला योजना के तहत 36.76 लाख हितग्राही हैं। सामान्य दिनों में केवल 22% लोग ही रिफिल कराते थे, लेकिन पिछले 10 दिनों में यह आंकड़ा बढ़कर 47% पहुंच गया है। आशंका जताई जा रही है कि कमर्शियल सिलेंडर न मिलने के कारण या तो पैनिक बुकिंग हो रही है या फिर घरेलू गैस का व्यावसायिक इस्तेमाल और कालाबाजारी शुरू हो गई है।

OTP और सॉफ्टवेयर के चक्कर में घंटों इंतजार

गैस एजेंसियों पर पहुंच रहे उपभोक्ताओं की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है।

  • OTP में देरी: अब व्हाट्सऐप बुकिंग अनिवार्य होने से ओटीपी आने में आधे से एक घंटे का समय लग रहा है। रायपुर के गुढ़ियारी स्थित गोदामों में लोग घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं।

  • सॉफ्टवेयर हैंग: कई एजेंसियों में कंपनी का सॉफ्टवेयर सुबह 9 बजे के बाद ही खुलता है, जबकि लोग सुबह 6 बजे से ही लाइन लगा रहे हैं। तकनीकी दिक्कतों के कारण वितरण की गति बेहद धीमी है।

होटल-रेस्टोरेंट में संकट: ‘रोटी नहीं, सिर्फ चावल मिलेगा’

कमर्शियल गैस की कमी का असर अब थाली पर भी दिख रहा है। रायपुर के सरकारी शिक्षण संस्थानों के मेस संचालकों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। छात्रों से कहा जा रहा है कि गैस न होने के कारण अब केवल चावल ही मिलेगा, रोटी नहीं। वहीं, होटल एसोसिएशन ने एडवाइजरी जारी कर संचालकों को इंडक्शन और राइस कुकर जैसे बिजली उपकरणों पर शिफ्ट होने की सलाह दी है।

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