Bison’s Death:कालातीत दवा के इस्तेमाल से मादा बाइसन की मौत, वन विभाग पर उठे सवाल

Bison’s Death:रायपुर: बरनावापारा अभ्यारण्य से गुरु घासीदास टाइगर रिजर्व भेजी गई मादा बाइसन की मौत 12 घंटे की ट्रक यात्रा के बाद हो गई। वन विभाग के दस्तावेजों से यह खुलासा हुआ है कि बाइसन की मौत लापरवाही के कारण हुई, जिसे हत्या जैसा अपराध माना जा रहा है।
एक्सपायर्ड दवा बनी मौत की वजह
वन्यजीवों को ट्रांसलोकेट करने के लिए उन्हें पहले बेहोश किया जाता है, फिर उन्हें होश में लाने के लिए एक विशेष दवा दी जाती है। दुर्भाग्य से, मादा बाइसन को बेहोश करने के लिए कैपटीवान नामक दवा का इस्तेमाल किया गया, जो मोर्फिन से 3,000 से 8,000 गुना ज्यादा ताकतवर होती है। लेकिन, होश में लाने के लिए दी गई एक्टिवोन दवा पहले ही 10 महीने पहले एक्सपायर हो चुकी थी। इस कारण बाइसन कई घंटों तक बेहोशी की हालत में रही और दम तोड़ दिया।
तड़प-तड़प कर मरी बाइसन
लंबे समय तक बेहोश रहने के कारण बाइसन को सांस लेने में दिक्कत हुई, उसकी हृदय गति प्रभावित हुई और शरीर का तापमान नियंत्रण से बाहर हो गया। यह सारी तकलीफें मिलकर उसकी दर्दनाक मौत का कारण बनीं।
दस्तावेजों से हुआ बड़ा खुलासा
वन विभाग के दस्तावेजों के मुताबिक, कैपटीवान और एक्टिवोन दवाएं दक्षिण अफ्रीका की एक कंपनी से दिसंबर 2022 में मंगवाई गई थीं। एक्टिवोन के चार शीशियों की एक्सपायरी मार्च 2024 थी, लेकिन फिर भी कालातीत दवा का इस्तेमाल किया गया।
27 दिसंबर 2024 को बलौदा बाजार वन मंडल को यह एक्सपायर्ड दवा भेजी गई, और 25 जनवरी 2025 को बाइसन को बेहोश करने के बाद यही दवा इस्तेमाल की गई।
वन विभाग पर उठे सवाल
वन्यजीव प्रेमी नितिन सिंघवी ने इस लापरवाही के खिलाफ आवाज उठाई और दस्तावेजों को सरकार को भेजकर बाइसन को न्याय दिलाने की मांग की।
सिंघवी ने पूछा:
1. कालातीत दवा का इस्तेमाल क्यों किया गया?
2. किस अधिकारी ने जंगल सफारी से एक्सपायर्ड दवा बलौदा बाजार वन मंडल भेजी?
3. कौन डॉक्टर था जिसने बाइसन को एक्सपायर्ड दवा दी?
4. 2018 में बाइसन ट्रांसलोकेशन की अनुमति मिली थी, लेकिन 4 साल तक कोई कदम क्यों नहीं उठाया गया?
5. जनवरी 2023 में अचानक किस अधिकारी ने इसे अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बना दिया, जिसके कारण बाइसन की मौत हुई?
वन विभाग पर जांच की मांग
इस गंभीर लापरवाही को लेकर वन्यजीव प्रेमियों और स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है। अब सवाल उठ रहे हैं कि वन विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करेगा?





