सीजफायर के बाद भी डर कायम: सरहद के लोग बोले – “चार रातें जैसे चार साल लग गए”

जम्मू-कश्मीर, पंजाब और राजस्थान के बॉर्डर इलाकों में सीजफायर के बाद भी डर का माहौल बना हुआ है। ऑपरेशन सिंदूर से बौखलाए पाकिस्तान की गोलाबारी ने सैकड़ों घर तबाह कर दिए। सरहद पर बसे लोग अब भी बंकरों और सुरक्षित जगहों पर रह रहे हैं।
तंगधार की रातें बनीं खौफनाक सपना
पाकिस्तान ने तंगधार और आसपास के गांवों में लगातार चार रातों तक भारी गोलाबारी की। त्रिबुनि, शमसपोरा, बागबेला जैसे गांवों में 100 से ज्यादा घर जल गए, 50 से अधिक वाहन टूट गए। 90% लोग गांव छोड़कर सुरक्षित जगहों पर चले गए हैं।
एजाज बट (कुपवाड़ा) कहते हैं, “सपने में भी घर टूटने की आवाजें सुनाई देती हैं। अब तो दोबारा घर बसाना भी नामुमकिन लगता है।”
पुंछ में अब भी पसरा है सन्नाटा
पुंछ के दूर-दराज गांवों पर भी पाकिस्तानी सेना ने गोले बरसाए। सुरनकोट जैसे इलाकों तक ड्रोन से हमला किया गया। पांच दिन तक चली गोलाबारी में 16 लोगों की मौत हुई और 50 से अधिक घायल हैं। यहां लोग अब भी घर लौटने से डर रहे हैं।
मुनिश शर्मा (पुंछ) बताते हैं, “हर सुबह डर के साथ होती है – क्या पाकिस्तान फिर हमला करेगा?”
उड़ी में लौटी कुछ राहत, पर भरोसा नहीं
उड़ी सेक्टर के 15 गांवों में भारी नुकसान हुआ। अब फिजा में थोड़ी शांति है, लोग धीरे-धीरे लौट रहे हैं, मगर डर अब भी ज़िंदा है।
मुदस्सिर अहमद (उड़ी) कहते हैं, “शांति दिख रही है, लेकिन मन में डर है कि कब फिर से धमाके शुरू हो जाएं।”
राजोरी के बाज़ार बंद, भरोसे की डोर कमजोर
राजोरी में अब तक का सबसे ज्यादा डर देखा गया। सीजफायर के बाद भी रात में गोलाबारी हुई, जिससे लोग घर छोड़कर चले गए। रविवार को बाजार नहीं खुले और हर तरफ सन्नाटा रहा।
राजेश गुप्ता (स्थानीय निवासी) बोले, “अगर सीजफायर के बाद भी गोले बरस सकते हैं, तो पाकिस्तान पर कैसे भरोसा करें?”
भारी नुकसान: मकान, दुकान, मवेशी और ज़िंदगी
राजोरी, पुंछ, उड़ी और तंगधार में बुनियादी ढांचे को बड़ा नुकसान हुआ है। 200 से ज्यादा घर और दुकानें तबाह हुईं, मवेशी मारे गए और धार्मिक स्थल भी निशाने पर रहे।





