बिजौर संकुल में फर्जी ट्रांसपोर्ट बिल घोटाला, स्कूटी–बाइक से दिखाया पिकअप, 4.88 लाख की सरकारी राशि हड़पी

बिलासपुर। सरकारी व्यवस्था में भ्रष्टाचार का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बिजौर संकुल में ट्रांसपोर्ट के नाम पर लाखों की हेराफेरी का खुलासा हुआ है। खेल सामग्री, किताबें और अन्य सामान पहुंचाने के लिए पिकअप और बड़े वाहनों का बिल लगाया गया, लेकिन असलियत में यह सामान स्कूटी, बाइक और कार से ढोया गया।
संकुल प्राचार्य हेमलता पांडे और समन्वयक मनोज सिंह ठाकुर पर आरोप है कि वर्ष 2022 से 2025 के बीच फर्जी परिवहन बिल लगाकर 4 लाख 88 हजार रुपए निकाल लिए गए। जांच में 30 से ज्यादा ऐसे बिल मिले, जिनमें वाहन नंबर दुपहिया के थे लेकिन वाउचर में उन्हें पिकअप दिखाया गया।
आरटीओ रिपोर्ट में साफ हुआ कि जिन नंबरों को पिकअप बताया गया था, वे असल में स्कूटी या मोटरसाइकिल हैं और भारी सामान ढोने लायक भी नहीं हैं। कई बिलों में तो मोबाइल नंबर, पता और सामान का विवरण तक नहीं था, फिर भी ऑडिट पास हो गया—जो उच्च अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत की ओर बड़ा इशारा है।
एक बिल में CG10-AP-8536 को पिकअप बताया गया, जबकि जांच में यह परमेश्वर साहू की स्कूटी निकली। इसी तरह 18 जुलाई 2024 को CG10-BC-1127 नंबर से किताबें भेजने का दावा किया गया, लेकिन यह नंबर दुर्गेश कौशिक की बाइक का निकला।
सरकारी धन की इस खुली लूट पर अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी विजय तांडे से संपर्क की कोशिशें की गईं, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
अब बड़ा सवाल यह है—इतने बड़े भ्रष्टाचार पर कब होगी कार्रवाई, और सरकारी खजाने के नुकसान का जिम्मेदार कौन होगा?








