मध्य प्रदेश कांग्रेस में फिर उभरी गुटबाजी, एक ही समय में दो अलग-अलग पदयात्राओं से संगठन में संदेश भ्रमित

मध्य प्रदेश में कांग्रेस एक बार फिर अंदरूनी खींचतान और गुटबाजी के दौर से गुजरती नजर आ रही है। लंबे समय से सत्ता से बाहर चल रही पार्टी प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभाने में असहज दिख रही है। संगठन को मजबूत करने के तमाम प्रयासों के बावजूद कांग्रेस जमीनी स्तर पर एकजुट नहीं हो पा रही है।
ताजा स्थिति यह है कि एक ही समय में पार्टी के दो वरिष्ठ नेता अलग-अलग जिलों में अलग-अलग मुद्दों को लेकर पदयात्राएं निकाल रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सीहोर जिले से मनरेगा में महात्मा गांधी का नाम हटाने और कानून में बदलाव के विरोध में सक्रिय हैं, जबकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी रायसेन जिले में ‘बूथ चलो, गांव चलो’ अभियान के तहत पदयात्रा कर रहे हैं।
जब प्रदेश के कई हिस्सों में दूषित पेयजल से लोगों की मौतें चिंता का विषय बनी हुई हैं, तब पार्टी के दोनों बड़े नेताओं के मुद्दे आम जनता को सीधे तौर पर जोड़ते नजर नहीं आ रहे। इससे संगठन से लेकर सड़क तक कांग्रेस की कमजोरी और अधिक उजागर हो रही है। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भी यह संदेश जा रहा है कि नेतृत्व एक दिशा में नहीं चल पा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस में दो समानांतर यात्राएं पार्टी के भीतर वर्चस्व की लड़ाई की ओर इशारा कर रही हैं। पहले भी प्रदेश में अलग-अलग अंचलों में अलग-अलग नेताओं का प्रभाव देखने को मिलता रहा है और अब वही तस्वीर दोबारा उभरती दिखाई दे रही है।
कांग्रेस नेतृत्व की ओर से हालांकि यह दावा किया जा रहा है कि दोनों कार्यक्रम तय योजना के तहत और संगठन के निर्देशों के अनुसार हैं तथा पार्टी पूरी ताकत से जनता के मुद्दों की लड़ाई लड़ रही है। इसके बावजूद एक साथ चल रही अलग-अलग यात्राएं यह संकेत दे रही हैं कि मध्य प्रदेश कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा और गुटबाजी की समस्या अभी भी जस की तस बनी हुई है।





