मध्यप्रदेश में महिलाओं और बच्चों की योजनाओं की पहुँच बढ़ाने पर जोर, सीएम मोहन यादव ने दिए सख्त निर्देश

महिला और बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि महिलाओं और बच्चों से जुड़ी सभी योजनाओं का लाभ हर व्यक्ति तक समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुंचे। उन्होंने विभाग को निर्देश दिए कि कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में आईटी का अधिकतम उपयोग किया जाए, ताकि मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग सुदृढ़ हो सके। बैठक में विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियां और नवाचार भी प्रस्तुत किए गए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग की गतिविधियाँ बच्चों और महिलाओं के स्वस्थ विकास तथा महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि पोषण और स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रमों में शिक्षा व स्वास्थ्य विभाग का समन्वय बढ़ाया जाए तथा महिलाओं की आत्मनिर्भरता के लिए तकनीकी शिक्षा और उद्योग विभाग से सहयोग लिया जाए।

सीएम यादव ने लाड़ली लक्ष्मी योजना पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी चरण पर बालिकाओं का ड्रॉपआउट न हो और ड्रॉपआउट होने पर तुरंत कारण पता कर समाधान कर बालिका को फिर से योजना में जोड़ा जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजनाओं में लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने आंगनवाड़ी केंद्रों की सुरक्षा के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के साथ समन्वय कर बाउंड्रीवॉल निर्माण कराने के निर्देश भी दिए। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि जिलों में किए गए नवाचारों का वैज्ञानिक मूल्यांकन कराया जाएगा और उपयुक्त पाए जाने पर उन्हें अन्य जिलों में लागू किया जाएगा।

बैठक में महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने बताया कि पीएम जनमन योजना के तहत भवन डिजाइन और ऑनलाइन मॉनिटरिंग मॉड्यूल को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। कुपोषण निवारण में झाबुआ जिले के मोटी आई नवाचार को प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार मिला है।

बैठक में विभाग की प्रमुख उपलब्धियाँ भी साझा की गईं। इनमें आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की पूर्णत: ऑनलाइन भर्ती प्रक्रिया, टेक होम राशन की पारदर्शी FRS व्यवस्था, 20,243 बच्चों को स्पॉन्सरशिप योजना से लाभ, भवन निर्माण की रियल-टाइम मॉनिटरिंग, जियो-फेंसिंग आधारित उपस्थिति प्रणाली और मातृ वंदना योजना में 9.70 लाख गर्भवती महिलाओं को सहायता शामिल हैं।

लाड़ली बहना योजना के तहत जनवरी 2024 से नवंबर 2025 तक 36 हजार 778 करोड़ रुपये का अंतरण किया गया। महिला हेल्पलाइन से 1 लाख 72 हजार महिलाओं को सहायता मिली और वन स्टॉप सेंटरों ने 52,095 महिलाओं को सुरक्षा प्रदान की। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत हजारों बालिकाओं को ड्राइविंग लाइसेंस, प्रशिक्षण और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी उपलब्ध कराई गई।

जिलों में संचालित नवाचारों में डिण्डौरी का रेवा प्रोजेक्ट, अशोकनगर का हृदय अभियान, देवास का किलकारी अभियान, नीमच का हमारी आंगनवाड़ी अभियान और दतिया का मेरा बच्चा अभियान शामिल रहे, जिनके माध्यम से पोषण, देखभाल, स्वास्थ्य जांच और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा मिला।

अगले तीन वर्षों की योजनाओं में शहरी आंगनवाड़ियों में 2026 से सेंट्रल किचन के माध्यम से गर्म भोजन उपलब्ध कराना, पूर्व-प्राथमिक शिक्षा में गुणवत्ता सुधार, लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत 34 लाख बालिकाओं को प्रोत्साहन राशि वितरित करना, 9,000 नए आंगनवाड़ी भवनों का निर्माण और महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े बड़े जागरूकता अभियानों की योजना शामिल है।

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