ED कोई सुपर कॉप नहीं जो हर मामले की जांच का अधिकारी: हाईकोर्ट

मद्रास हाई कोर्ट ने की कड़ी टिप्पणी

दिल्ली। मद्रास हाई कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्यशैली पर तीखी टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि ईडी कोई “सुपरकॉप” नहीं है, जिसे हर आपराधिक मामले में दखल देने का अधिकार हो। अदालत ने कहा कि ईडी न तो कोई घूमता हुआ हथियार है और न ही ऐसा ड्रोन जो किसी भी अपराध पर अपनी मर्जी से हमला कर सके। ईडी की शक्तियां सीमित हैं और केवल तभी इस्तेमाल हो सकती हैं जब कोई पूर्वनिर्धारित अपराध हो और उससे जुड़ी अवैध आय का प्रमाण मिले।

यह टिप्पणी कोर्ट ने आरकेएम पावरजेन प्राइवेट लिमिटेड की उस याचिका पर की, जिसमें कंपनी की ₹901 करोड़ की फिक्स्ड डिपॉजिट को ईडी द्वारा फ्रीज किए जाने को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने ईडी के इस आदेश को खारिज कर दिया और कहा कि जब कोई पूर्व अपराध ही नहीं है, तो पीएमएलए (धन शोधन निवारण अधिनियम) के तहत कार्रवाई करना पूरी तरह अनुचित है।

कोर्ट ने ईडी की तुलना ‘लिमपेट माइन’ से की, जो तब तक निष्क्रिय रहती है जब तक वह किसी ‘जहाज’ यानी ठोस अपराध पर टिकी न हो। मामले में आरकेएम कंपनी को 2006 में फतेहपुर कोयला ब्लॉक आवंटित किया गया था, जिसे 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया। सीबीआई ने एफआईआर के बाद 2017 में केस बंद कर दिया था, इसके बावजूद ईडी ने कार्रवाई जारी रखी थी। कोर्ट ने माना कि ईडी का यह कदम कानून का उल्लंघन है।

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