दिल्ली हाईकोर्ट की नाराजगी: केजरीवाल को बंगला देने में देरी पर केंद्र सरकार को कड़ी फटकार

दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को सरकारी आवास आवंटित करने में देरी के लिए मंगलवार को केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई। जस्टिस सचिन दत्ता ने सुनवाई के दौरान कहा कि सरकार आवास आवंटन में मनमानी नहीं कर सकती। किसे घर मिलेगा, किसे नहीं—यह चुनिंदा तरीके से तय करना उचित नहीं है। कोर्ट ने केंद्र के रवैये को “फ्री सिस्टम” जैसा बताते हुए नाराजगी जताई।

AAP की याचिका में कहा गया था कि केजरीवाल ने अक्टूबर 2024 में फ्लैगस्टाफ रोड स्थित अपना आधिकारिक आवास खाली कर दिया था और तब से वे अस्थायी तौर पर पार्टी सांसद के घर में रह रहे हैं। पार्टी का दावा है कि मई 2025 में मायावती द्वारा खाली किया गया 35, लोधी एस्टेट वाला बंगला केजरीवाल को देने का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन केंद्र ने टालमटोल कर उसे किसी और को आवंटित कर दिया।

केंद्र की ओर से पेश ASG चेतन शर्मा ने कहा कि किसी विशेष बंगले की मांग नहीं की जा सकती और सरकारी घरों के लिए लंबी वेटिंग लिस्ट है। इस पर कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि पहले भी वेटिंग लिस्ट ने कभी आवंटन में रुकावट नहीं डाली। कोर्ट ने केंद्र से आवास आवंटन की नीति और संबंधित रिकॉर्ड 18 सितंबर तक जमा करने का निर्देश दिया। AAP का कहना है कि राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष को नियमों के अनुसार एक सरकारी आवास का अधिकार है, बशर्ते उनके पास निजी मकान न हो। हाईकोर्ट ने साफ किया कि केंद्र का लापरवाह रवैया उचित नहीं है और वेटिंग लिस्ट का बहाना मान्य नहीं होगा।

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