नसबंदी के दौरान बिल्ली की मौत, डॉक्टर को ठहराया गया दोषी — देना होगा ₹25,000 का मुआवजा

नोएडा: एक पशु चिकित्सक की लापरवाही से नसबंदी के दौरान बिल्ली की मौत का मामला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग तक पहुंच गया। आयोग ने डॉक्टर को सेवा में कमी का दोषी ठहराते हुए बिल्ली के मालिक को ₹25,000 मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह राशि 30 दिनों के भीतर चुकानी होगी, अन्यथा उस पर 6% वार्षिक ब्याज भी देना पड़ेगा।
यह मामला नोएडा सेक्टर 105 निवासी तमन गुप्ता ने दायर किया था। उन्होंने पेट वेल वेटनरी क्लिनिक के डॉक्टर सुरेश सिंह पर आरोप लगाया कि उन्होंने नसबंदी के दौरान जरूरी सावधानियां नहीं बरतीं, जिससे बिल्ली की मौत हो गई। गुप्ता के मुताबिक, डॉक्टर ने सर्जरी से पहले की ब्लड टेस्ट रिपोर्ट नहीं दी और 17,480 रुपये वसूले।
शिकायतकर्ता ने आयोग से ₹15 लाख मुआवजे की मांग की थी, जिसमें मानसिक पीड़ा और कानूनी खर्च शामिल थे। हालांकि डॉक्टर की ओर से कोई जवाब न आने पर 17 जून को मामला एकतरफा सुना गया। जांच में पाया गया कि बिल्ली पहले से बीमार थी, फिर भी डॉक्टर ने सर्जरी की और टेस्ट रिपोर्ट मालिक से छिपाई।
कोर्ट ने कहा कि डॉक्टर ने “जानबूझकर जोखिम को नजरअंदाज” किया, जो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत सेवा में गंभीर कमी है। आयोग ने 30 दिनों में ₹25,000 मुआवजा देने का आदेश दिया है।





