कांग्रेस ने विदिशा से शुरू किया संगठन मजबूत करने का अभियान, पायलट प्रोजेक्ट के तहत 100 नेता करेंगे काम

भोपाल। मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने अपने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी पहल की है। इसके तहत पार्टी ने एक पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की है, जिसकी प्रयोगशाला बनी है विदिशा—बीजेपी के दिग्गज नेता शिवराज सिंह चौहान का गढ़। यह अभियान 22 मई से शुरू हो गया है और करीब 20 दिन तक चलेगा।
क्यों चुना गया विदिशा?
विदिशा को बीजेपी का अभेद्य किला माना जाता है। यहां 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी थी। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का गृह क्षेत्र होने की वजह से कांग्रेस ने यहां से संगठनात्मक सुधार की शुरुआत कर बीजेपी को सीधी चुनौती देने की रणनीति बनाई है।
इसके अलावा, राजधानी भोपाल से विदिशा की नजदीकी के कारण यहां नेताओं की पहुंच और मॉनिटरिंग भी आसान होगी।
100 कांग्रेस नेता करेंगे गांव-वार्ड स्तर पर काम
पायलट प्रोजेक्ट के तहत कांग्रेस के करीब 100 अनुभवी नेता विदिशा जिले की सभी ग्राम पंचायतों और वार्डों में जाकर संगठन की स्थिति का आकलन करेंगे। वे यह पता लगाएंगे कि कहां संगठन मजबूत है और कहां कमजोर। इसके आधार पर आगे की रणनीति और नियुक्तियों की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
जातीय समीकरण भी बनाएंगे संतुलित
इस अभियान के तहत कांग्रेस की टीम यह भी जांचेगी कि संगठन में सभी प्रमुख जाति समूहों का प्रतिनिधित्व है या नहीं। खासतौर पर दलित और ओबीसी वर्ग को संगठन में उचित स्थान देने की योजना है ताकि सामाजिक संतुलन साधा जा सके।
प्रोजेक्ट के तहत दो विधानसभा क्षेत्रों की रिपोर्ट डिजिटल रूप में और तीन की रिपोर्ट फिजिकल यानी पेपर पर तैयार की जाएगी। इससे यह जांचा जाएगा कि रिपोर्टिंग की विश्वसनीयता और सटीकता कितनी है।
2028 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए तैयारी
इस पूरे अभियान का मकसद है कि 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस अपने कैडर को पूरी तरह तैयार कर ले। पंचायत और वार्ड स्तर तक समितियों का गठन कर पार्टी स्थानीय स्तर पर मज़बूती से खड़ी हो सके—यही लक्ष्य है इस पायलट प्रोजेक्ट का।
प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और प्रभारी हरीश चौधरी खुद इस अभियान की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। कांग्रेस को उम्मीद है कि इस प्रयोग से उसे न सिर्फ विदिशा में बल्कि पूरे प्रदेश में संगठनात्मक ऊर्जा मिलेगी।





