कोल्ड्रिफ कफ सीरप केस: श्रीसन फार्मा से प्रोपेलीन ग्लायकाल का बिल गायब, एसआईटी की जांच तेज

मध्य प्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ सीरप से 24 बच्चों की मौत के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। जांच में सामने आया है कि सीरप बनाने में इस्तेमाल हुए प्रोपेलीन ग्लायकाल का बिल ही कंपनी रिकॉर्ड से गायब है। यह वही केमिकल है, जिसकी गुणवत्ता को लेकर पूरे मामले की जांच केंद्रित है।
मामले में श्रीसन फार्मा कंपनी की केमिकल एनालिस्ट के. माहेश्वरी को गिरफ्तार किया गया है और उन्हें तीन दिन की पुलिस रिमांड पर सौंपा गया है। एसआईटी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कंपनी ने औषधीय उपयोग वाला प्रोपेलीन ग्लायकाल खरीदा था या औद्योगिक उपयोग वाला। अगर जांच में औद्योगिक केमिकल का इस्तेमाल साबित होता है, तो आपूर्तिकर्ता पर भी कार्रवाई तय मानी जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने एनालिस्ट माहेश्वरी से सीरप की गुणवत्ता जांच रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई। इससे यह संदेह गहरा गया है कि उत्पाद की टेस्टिंग कराई ही नहीं गई थी। जांच में यह भी सामने आया कि कफ सीरप में डायथिलीन ग्लायकाल (डीईजी) की मात्रा 48.6 प्रतिशत पाई गई, जबकि मानक सीमा सिर्फ 0.1 प्रतिशत है। इसी रासायनिक विषाक्तता के कारण 24 मासूम बच्चों की जान चली गई थी।
सुरक्षा कारणों से पुलिस ने माहेश्वरी को देर रात कोर्ट में पेश किया, क्योंकि परासिया क्षेत्र के लोगों में कंपनी के खिलाफ भारी आक्रोश है। इससे पहले कंपनी के मालिक जी. रंगनाथन को चेन्नई से गिरफ्तार किया जा चुका है। अब तक पांच आरोपित गिरफ्तार हो चुके हैं, जिनमें डॉक्टर प्रवीण सोनी, कंपनी के मालिक और केमिकल एनालिस्ट शामिल हैं।
तमिलनाडु औषधि प्रशासन ने श्रीसन फार्मा के कांचीपुरम स्थित संयंत्र का निरीक्षण कर 364 खामियां पाई थीं, जिसके बाद उत्पादन बंद करा दिया गया और कंपनी का लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द कर दिया गया। एसआईटी की जांच अब इस दिशा में आगे बढ़ रही है कि घातक सीरप बनाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी लापरवाही से हुई।





