कोल्ड्रिफ कफ सिरप और मिलावटी दवा, राज्यों में सुस्त कार्रवाई

दिल्ली। कोल्ड्रिफ कफ सिरप से मध्य प्रदेश और राजस्थान में बच्चों की मौत के बाद दवा में मिलावट के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। हालांकि, अधिकांश राज्यों में जांच और कार्रवाई बेहद धीमी है। कहीं सैंपल जांच में देरी हो रही है, तो कहीं दोषियों को सजा दिलाने में समय लग रहा है।

मध्य प्रदेश: प्रदेश में वर्ष 2024 तक दवाओं के सैंपलों की जांच के लिए केवल भोपाल में एक लैब थी, जिसकी वार्षिक क्षमता चार हजार सैंपल की है। इस वर्ष इंदौर और जबलपुर में नई लैबें शुरू हुईं, जिनकी क्षमता एक-एक हजार सैंपल की है। हर साल प्रदेश में सात हजार से अधिक सैंपल जांच के लिए आते हैं। 2024 में 7211 सैंपल आए, लेकिन क्षमता कम होने से केवल 4398 की जांच हो पाई। इनमें 51 सैंपल अमानक पाए गए। पिछले साल केवल एक मामले में आरोपी को सजा मिली।

झारखंड और उत्तराखंड: झारखंड में कोल्ड्रिफ कफ सिरप आपूर्ति नहीं हुई, इसलिए कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन सैंपल लिए जा रहे हैं। उत्तराखंड में अभी किसी कंपनी पर कार्रवाई नहीं हुई, केवल सात दुकानों को सील किया गया और 44 बोतलें नष्ट की गईं। 190 सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं।

हरियाणा: मिलावटी दवाओं पर रोक लगाते हुए चार खांसी की दवाओं पर प्रतिबंध लगाया गया। इन दवाओं में डायएथिलीन ग्लाइकाल जैसे खतरनाक रसायन पाए गए। सभी सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए।

छत्तीसगढ़: पेंडारी नसबंदी शिविर में 13 महिलाओं की मौत हुई थी। जांच में रायपुर की महावर फार्मा और बिलासपुर की कविता फार्मा की दवा में जिंक फास्फाइड मिला। दोनों कंपनियों का लाइसेंस रद्द हुआ, संचालक जेल गए, चार स्वास्थ्य अधिकारी निलंबित हुए।

दिल्ली: 2022 से 2025 में 14 नकली दवा मामले दर्ज हुए, 18.60 करोड़ रुपये की दवा नकली पाई गई। 10 मामलों में आरोप-पत्र दाखिल हुए, पर केवल तीन में सजा मिली। जुलाई 2025 में पश्चिम विहार और सिविल लाइन्स में छापों में 11 गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया लंबी होने से सजा में देरी हो रही है।

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