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संपत्ति कर में भारी बढ़ोतरी से नागरिक नाराज़ – नगर निगम के फैसले पर उठे सवाल

बिलासपुर: नगर निगम द्वारा हाल ही में संपत्ति कर में की गई भारी बढ़ोतरी से शहरवासियों में नाराज़गी बढ़ती जा रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जो लोग ईमानदारी से टैक्स भरते हैं, उन्हीं पर हर बार बोझ क्यों डाला जा रहा है, जबकि 15 साल से टैक्स नहीं देने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती।

नई टैक्स दरों के अनुसार, पहले जहां 850 वर्गफीट के मकान पर 1669 रुपये टैक्स लिया जाता था, अब यह बढ़कर 1966 रुपये हो गया है। कुछ मामलों में तो टैक्स की राशि लगभग दोगुनी हो गई है — जैसे 2297 रुपये की जगह अब 4613 रुपये और 3688 रुपये की जगह 7012 रुपये तक टैक्स वसूला जा रहा है।

नागरिकों का आरोप है कि नगर निगम ने वेस्ट यूजर चार्ज को दोबारा जोड़कर टैक्स की गणना की है, जिससे टैक्स की कुल राशि और भी बढ़ गई है। साथ ही, पानी का बिल अब सालभर के लिए एक साथ जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है, जबकि पहले इसे हर महीने 200 रुपये के हिसाब से जमा किया जाता था।

नगर निगम क्षेत्र में अभी कुल 1,27,189 करदाता हैं, जिनमें से लगभग 10 से 15 प्रतिशत लोग पिछले 15 वर्षों से कोई टैक्स नहीं भर रहे हैं। इनमें शहर के 59,180 और आउटर एरिया के 68,009 करदाता शामिल हैं।

नगर निगम की सफाई

निगम का कहना है कि यह टैक्स बढ़ोतरी दो साल पहले किए गए GIS सर्वे के आधार पर की गई है। इस सर्वे का उद्देश्य था टैक्स चोरी को रोकना। निगम के मुताबिक, कई मकानों और दुकानों में बिना जानकारी दिए अतिरिक्त निर्माण कर लिया गया है, इसलिए उनका टैक्स बढ़ना स्वाभाविक है।

निगम अब पुराने रिकॉर्ड के बजाय I-WMS (इंटीग्रेटेड वर्कफ्लो मैनेजमेंट सिस्टम) के जरिए नई दरों से टैक्स वसूल रहा है। अधिकारियों का दावा है कि कई रसूखदार और व्यापारी पुराने रिकॉर्ड के आधार पर ही टैक्स भरते आ रहे थे, जबकि उनके निर्माण में बड़ा बदलाव हो चुका है।

नागरिकों की मांग

शहरवासियों का कहना है कि टैक्स वसूली में पारदर्शिता होनी चाहिए और जो लोग वर्षों से टैक्स नहीं भर रहे हैं, पहले उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। ईमानदार करदाताओं पर बार-बार बोझ डालना नाइंसाफी है।

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