छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार पर लगाम के लिए सरकार का डिजिटल मिशन, सुशासन की ओर बड़ा कदम

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने भ्रष्टाचार पर रोक लगाने और शासन में पारदर्शिता लाने के लिए तकनीकी नवाचारों को अपनाना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में चल रही इस विशेष डिजिटल पहल का मकसद सरकारी कामकाज में जवाबदेही और नागरिकों की भागीदारी बढ़ाना है।
अब राज्य के विभिन्न विभागों में कामकाज पूरी तरह डिजिटल हो रहा है। भूमि रिकॉर्ड, निर्माण परियोजनाओं की ट्रैकिंग, खरीद-फरोख्त और ठेका प्रक्रियाएं ऑनलाइन की जा रही हैं। इससे न केवल देरी कम होगी, बल्कि हर लेन-देन का रिकॉर्ड सार्वजनिक रहेगा, जिससे गड़बड़ी करना लगभग असंभव हो जाएगा।
ग्रामीण इलाकों में भी डिजिटल भुगतान से पारदर्शिता बढ़ी
सरकार ने डिजिटल भुगतान प्रणाली को बढ़ावा दिया है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में अब सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंच रहा है। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई है और धन का दुरुपयोग भी रुका है।
डेटा एनालिटिक्स से निगरानी और नियंत्रण
सरकार ने विभागीय कामकाज पर नज़र रखने के लिए डेटा एनालिटिक्स का सहारा लिया है। इससे ठेकों, खर्च और परियोजनाओं की प्रगति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। अनियमितताएं अब शुरुआती चरण में ही पकड़ में आ रही हैं।
भ्रष्ट अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई
सरकार ने भ्रष्टाचार विरोधी अभियान भी तेज किया है। हाल ही में आबकारी विभाग के 22 अधिकारियों को भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित किया गया है। इससे यह साफ संदेश गया है कि भ्रष्टाचार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
नतीजे और आगे की योजना
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, ई-गवर्नेंस और डिजिटल निगरानी लागू होने के बाद पिछले एक साल में भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों में करीब 35% की कमी आई है। साथ ही, परियोजनाओं के समय पर पूरे होने की दर भी बढ़ी है।
भविष्य में सरकार इस डिजिटल निगरानी प्रणाली को ब्लॉक और पंचायत स्तर तक विस्तार देने की योजना बना रही है ताकि राज्य का हर नागरिक सुशासन और पारदर्शिता का लाभ उठा सके।





