हवा-हवाई साबित हुआ ‘स्टांप ड्यूटी’ घटाने का सरकारी फैसला
आदेश के इंतज़ार में अटका धान उठाव, राइस मिलर्स हताश

रायपुर/बिलासपुर: राज्य सरकार द्वारा राइस मिलर्स (Chhattisgarh Rice Miller News) को राहत देने के लिए किया गया एक बड़ा फैसला लालफीताशाही के जाल में उलझकर रह गया है। राज्य मंत्रिमंडल (कैबिनेट) ने राइस मिलरों की बैंक गारंटी पर लगने वाली स्टांप ड्यूटी को 0.25 प्रतिशत से घटाकर 0.05 प्रतिशत करने का निर्णय तो ले लिया, लेकिन हफ्तों बाद भी यह ‘राहत’ मंत्रालय की फाइलों से निकलकर जिला कार्यालयों तक नहीं पहुँच पाई है। नतीजतन, बैंक गारंटी के अभाव में धान का उठाव पूरी तरह ठप पड़ा है और राइस मिलर्स असमंजस की स्थिति में हैं।
इस प्रशासनिक सुस्ती के कारण धान खरीदी के पीक सीजन में पूरी व्यवस्था चरमराने के आसार बन गए हैं।
1. मंत्रालय से जिले तक नहीं पहुँचा आदेश: बैंक गारंटी के फेर में फंसी कस्टम मिलिंग
राज्य सरकार का दावा था कि स्टांप ड्यूटी में भारी कटौती से राइस मिलिंग उद्योग को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी और कस्टम मिलिंग की प्रक्रिया में तेजी आएगी। कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर भी लग गई। लेकिन धरातल पर स्थिति इसके ठीक विपरीत है। जिला पंजीयक कार्यालयों और बैंकों तक अभी तक सामान्य प्रशासन विभाग या वाणिज्यिक कर विभाग का कोई लिखित आदेश या राजपत्र अधिसूचना (Gazette Notification) नहीं पहुँची है।
प्रशासनिक मशीनरी के बीच समन्वय की इस कमी ने एक अजीबोगरीब स्थिति पैदा कर दी है। सरकार ने घोषणा कर दी है, लेकिन सिस्टम उसे मानने को तैयार नहीं है। राइस मिलर्स जब बैंक या स्टाम्प वेंडर के पास जाते हैं, तो उनसे पुराने आदेश का हवाला दिया जाता है।
2. 0.25 बनाम 0.05 प्रतिशत का पेंच: पुरानी दरों पर अड़े बैंक, मिलर्स के हाथ खाली
कस्टम मिलिंग की प्रक्रिया में राइस मिलरों को धान उठाव से पहले अनिवार्य रूप से बैंक गारंटी (BG) जमा करनी होती है। इसी गारंटी के आधार पर उन्हें शासन से धान मिलता है। चूंकि अब तक बैंकों के पास नई दरों (0.05%) को लेकर कोई सर्कुलर नहीं आया है, वे तकनीकी आधार पर पुरानी दर (0.25%) पर ही स्टाम्प शुल्क जमा करने की मांग कर रहे हैं।
मिलरों का तर्क है कि जब सरकार ने दरें घटा दी हैं, तो वे पांच गुना अधिक शुल्क क्यों चुकाएं? इस गतिरोध के चलते सैकड़ों मिलरों की बैंक गारंटी की फाइलें अटकी पड़ी हैं। मिलर्स का कहना है कि यह केवल पैसों का सवाल नहीं है, बल्कि सिस्टम की विश्वसनीयता का प्रश्न है। बैंक बिना लिखित आदेश के एक कदम आगे बढ़ाने को तैयार नहीं हैं, और मिलर्स नुकसान उठाने को राजी नहीं हैं।
3. धान खरीदी और उठाव पर गहराया संकट: मिलर्स की चेतावनी, जल्द आदेश जारी न हुआ तो चरमरा जाएगी व्यवस्था
बैंक गारंटी न बन पाने का सीधा असर धान के उठाव (Lifting) पर दिखना शुरू हो गया है। धान खरीदी केंद्रों में बंपर आवक हो रही है, लेकिन उठाव न होने से वहां जाम की स्थिति बन रही है। मिलर्स द्वारा धान का उठाव शुरू न कर पाने से भंडारण और मिलिंग की पूरी चेन प्रभावित हो रही है।
राइस मिलर संघों ने इस मुद्दे पर अपनी गहरी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि “कैबिनेट का फैसला तभी सार्थक है जब वह जमीन पर लागू हो।” संघ ने सरकार से मांग की है कि:
स्टांप ड्यूटी कटौती का लिखित आदेश तत्काल जारी किया जाए।
जिला प्रशासन और बैंक मुख्यालयों को स्पष्ट दिशा-निर्देश भेजे जाएं।
मिलरों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले कुछ दिनों में स्थिति स्पष्ट नहीं हुई, तो धान खरीदी केंद्रों में जगह की कमी हो जाएगी और पूरी खरीदी व्यवस्था ध्वस्त हो सकती है। फिलहाल, जिला प्रशासन की ओर से इस मामले में साधी गई चुप्पी ने मिलरों की बेचैनी को और बढ़ा दिया है।





