छत्तीसगढ़ विधानसभा सत्र: बिजली, शराब और कानून व्यवस्था के मुद्दों पर घिरेगी सरकार
5 दिवसीय मानसून सत्र शुरू

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र 14 जुलाई से शुरू होकर 18 जुलाई तक चलेगा। इस सत्र में विपक्ष कांग्रेस सरकार को घेरने की रणनीति के साथ मैदान में उतरी है। सत्र से पहले नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कांग्रेस विधायकों की बैठक ली और कहा कि सत्र की शुरुआत में ही खाद और बीज की कमी को लेकर स्थगन प्रस्ताव लाया जाएगा।
कांग्रेस का आक्रामक रुख
डॉ. महंत ने कहा कि कांग्रेस विधायक पूरी आक्रामकता के साथ सदन में उतरेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की समस्याओं, बिजली दरों में वृद्धि, स्कूलों के युक्तियुक्तकरण और शराब दुकानों की बढ़ती संख्या जैसे मुद्दों पर सरकार नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि यह सत्र जनता की आवाज़ बुलंद करने का मंच बनेगा।
बीजेपी सरकार ने किया पलटवार
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में बीजेपी विधायक दल की बैठक हुई। संसदीय कार्यमंत्री केदार कश्यप ने कहा कि कांग्रेस के पास अब ठोस मुद्दे नहीं बचे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने को तैयार है। साथ ही यह भी कहा कि कांग्रेस शराब घोटाले और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर खुद ही फंसी हुई है।
जनता से जुड़े मुद्दे होंगे प्रमुख
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि किसान, बेरोजगारी, नकली शराब, रेत खनन, और गरीबों के घर तोड़े जाने जैसे विषय सदन में प्रमुखता से उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सिर्फ सदन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सड़क पर भी जनता की आवाज़ बनेगी।
सदन में तीखी बहस के आसार
इस बार कांग्रेस विधायकों ने सदन में 996 सवाल लगाए हैं, जो इस सत्र को और तीखा बना सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार के डेढ़ साल के कार्यकाल के बाद कांग्रेस अब आक्रामक मुद्रा में नजर आ रही है।
पहली बार अनुपूरक बजट नहीं पेश होगा
इस बार राज्य के इतिहास में पहली बार मानसून सत्र में अनुपूरक बजट पेश नहीं किया जाएगा। सरकार का कहना है कि उसके पास आगामी तीन माह के लिए पर्याप्त वित्तीय व्यवस्था है। आकस्मिकता निधि को बढ़ाकर 100 करोड़ से 1000 करोड़ रुपए कर दिया गया है। सरकार जहां पूरी तैयारी के साथ जवाब देने के लिए तैयार है, वहीं विपक्ष आक्रामक तेवर में है। यह सत्र छत्तीसगढ़ की राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।





