कांकेर में एक्सपायरी दवाओं के गलत निपटान का मुद्दा संसद में उठा, सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने केंद्र से कड़े कदम की मांग की

रायपुर। लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कांकेर जिले में हुई एक गंभीर घटना का मुद्दा उठाते हुए संसद में सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि एक्सपायरी दवाओं को गलत तरीके से जलाने की वजह से स्कूली बच्चों और स्थानीय लोगों के बीमार पड़ने का जोखिम पैदा हो गया था।
सांसद ने कहा कि ऐसी घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं और इनकी पुनरावृत्ति बिल्कुल नहीं होनी चाहिए।
CDSCO और Bio-Medical Waste Rules का पालन जरूरी
अग्रवाल ने संसद में जोर देकर कहा कि CDSCO के दिशा-निर्देश और Bio-Medical Waste Rules 2016 को तत्काल सख्ती से लागू किया जाए।
उन्होंने बताया कि इन नियमों का पालन न करने से न सिर्फ लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ता है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा भी प्रभावित होती है।
हर जिले में सुरक्षित डिस्पोजल सुविधा बनाने की मांग
सांसद ने सुझाव दिया कि
- हर जिले में सुरक्षित दवा-निपटान (डिस्पोजल) इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाए।
- स्थानीय अधिकारियों और कर्मचारियों को अनिवार्य प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि वे एक्सपायरी दवाओं और बायोमेडिकल वेस्ट को सुरक्षित तरीके से नष्ट कर सकें।
- नए अस्पतालों को तभी अनुमति दी जाए, जब उनके पास मानक दवा-डिस्पोजल सुविधा हो।
नियमित निरीक्षण की मांग
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है, इसलिए
- राज्य और जिला स्तर पर नियमित निरीक्षण होना चाहिए।
- स्वास्थ्य संस्थानों में दवा-डिस्पोजल प्रक्रिया की कड़ी निगरानी की जाए।
उन्होंने कहा कि कांकेर की घटना बताती है कि छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में अभी भी सुरक्षा मानकों का पालन ठीक से नहीं हो रहा है।
स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए कड़े नियम जरूरी
सांसद अग्रवाल ने कहा कि यदि केंद्र सरकार उनके सुझावों को लागू करती है, तो
- बच्चों और आम जनता को गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों से बचाया जा सकता है,
- और स्वास्थ्य व्यवस्था में जनता का विश्वास मजबूत होगा।
उन्होंने केंद्र सरकार से सख्त और दूरदर्शी नीतियां लागू करने की अपील की।
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