बृजमोहन अग्रवाल: जनसेवा का पर्याय, रायपुर की धड़कन और छत्तीसगढ़ की पहचान

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में यदि समर्पण, संकल्प और समाधान की बात होती है, तो बृजमोहन अग्रवाल का नाम स्वतः सामने आ जाता है। करीब चार दशकों से सक्रिय राजनीति में रहते हुए उन्होंने जनप्रतिनिधि होने का अर्थ केवल पद नहीं, बल्कि निरंतर जनसेवा साबित किया है।
8 बार विधायक, अब सांसद
1989 से 2023 तक (2018 को छोड़कर) लगातार 8 बार रायपुर से विधायक चुने जाना अपने आप में एक रिकॉर्ड है। हर चुनाव में बढ़ते वोट मार्जिन के साथ जनता का विश्वास जीतना उनकी लोकप्रियता का प्रमाण है। 2024 में रायपुर से लोकसभा सांसद बनने के बाद वे संसद में छत्तीसगढ़ के मुद्दों को मुखरता से उठा रहे हैं।
जनसेवा की जीवंत मिसाल
रात के ढाई बजे भी किसी जरूरतमंद की मदद के लिए उपलब्ध रहना, लोगों के सुख-दुख में शामिल होना, अस्पताल से लेकर विवाह समारोह तक हर जगह उपस्थिति—यही उनकी कार्यशैली है। रायपुर में यदि वे सड़क पर पैदल निकल जाएं तो लोगों का स्नेह स्वतः उमड़ पड़ता है।
संगठन और सत्ता में संतुलन
भारतीय जनता पार्टी के कोर ग्रुप सदस्य के रूप में उन्होंने संगठन को मजबूत आधार दिया। कार्यकर्ताओं से उनका आत्मीय संबंध आज भी वैसा ही है जैसा शुरुआती दिनों में था। छात्र जीवन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़कर उन्होंने संघर्ष की राजनीति सीखी।
मंत्री रहते हुए उल्लेखनीय कार्य
2013 में कृषि, पशुपालन, जल संसाधन सहित कई विभागों की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ को लगातार तीन बार कृषि कर्मण पुरस्कार दिलाने में भूमिका निभाई। रायपुर में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, पुरखौती मुक्तांगन, महादेव घाट का विकास, राजिम कुंभ की शुरुआत और राजधानी के अधोसंरचनात्मक विस्तार जैसे कार्य उनके कार्यकाल की पहचान बने।
सबके ‘मोहन भैय्या’
उनकी राजनीति का मूल मंत्र है—“जनसेवा ही धर्म है।” जाति, वर्ग, धर्म से ऊपर उठकर सभी के लिए समान भाव रखने की छवि ने उन्हें “सबके मोहन भैय्या” बना दिया है।
राजनीति में जहां अक्सर रिश्ते औपचारिक हो जाते हैं, वहां बृजमोहन अग्रवाल ने संबंधों को आत्मीयता से जोड़े रखा। शायद यही कारण है कि रायपुर ही नहीं, समूचे छत्तीसगढ़ में वे हर दिल अज़ीज़ नेता माने जाते हैं।





