इंसानों की तरह गीत गातें हैं पक्षी, इनकी भी होती है लोकल लैंग्वेज..

नई दिल्ली। क्या आप जानते हैं सिर्फ इंसान ही नहीं बल्कि पक्षी भी गीत गाते हैं और एक दुसरे से सीखते भी हैं. दरअसल ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक लाख से पक्षियों का रिसर्च किया.. जिसमें उन्हें ये पता लगा कि इंसानों की तरह  पक्षियों की भी स्थानीय गीतों की संस्कृति होती है.. जो कि इलाके के अनुसार उन पक्षियों की खासियत होती है..

इतना नही नहीं घूमने फिरने वाले पक्षियों का इस में योगदान होता है और अजनबियों को अपने समूह में शामिल करने से भी गीत संगीत का खासा प्रसार होता है जैसा कि इंसानों के साथ भी होता है.अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता निलो मेरिनो रेकाल्डे का कहना है कि पक्षी की गतिविधियां और जीवन इतिहास उनके गाए गानों का आकार देता है, इसके साफ प्रमाण मिले हैं. इतना नहीं हैं पक्षियों के जगह छोड़ने और मरने के बाद बहुत सारे गीत उनके साथ गायब भी हो जाते हैं. क्योंकि पक्षियों के पास परंपरा सहेजने का कोई तरीका नहीं होता है. फिर भी संगीत एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक भी जाता है.

वहीं नए पक्षी अपने गीतों में नए बदलाव लाते हैं. इतना ही नहीं यह बदलाव उम्र के साथ भी होता है और स्थान परिवर्तन से भी होता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि पक्षी वैसे तो स्थानीय स्तर का संगीत रचते रहते हैं और अपनी बोली और संगीत परम्पराओं को बनाने का काम भी करते हैं. वहीं जैसे जैसे पक्षी किसी समूह से में ज्यादा जुड़ते चले जाते हैं वे और भी संगीत सीखते चले जाते हैं.

वहीं अजीब बात यह भी पाई गई है, जहां जो पक्षी अपने जन्मस्थान के करीब रहते हैं वह ज्यादा और खास तरह के स्थानीय संगीत संस्कृति को रचते हैं. यह बिलकुल वैसा ही है जैसे अपने जन्म स्थान के पास रहने वाले संगीतकार खास बोली और संगीत स्टाइल की रचना करते हैं.

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