बिलासपुर: स्कूलों और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया जारी, शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की कोशिश

बिलासपुर जिले में शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण (तर्कसंगत समायोजन) की प्रक्रिया तेजी से जारी है। इसके तहत अतिशेष शिक्षकों की काउंसिलिंग कर उन्हें नई जगह पदस्थ किया जा रहा है। यह काम छत्तीसगढ़ सरकार की उस पहल का हिस्सा है, जिसमें शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
क्या है युक्तियुक्तकरण?
युक्तियुक्तकरण का मतलब है – शिक्षकों और स्कूलों के संसाधनों का ऐसा समायोजन करना, जिससे सभी विद्यालयों में बराबर और उचित ढंग से शिक्षक और सुविधाएं मिल सकें। कई स्कूलों में शिक्षकों की संख्या ज़रूरत से ज़्यादा है, वहीं कुछ स्कूल ऐसे हैं जहां शिक्षक नहीं हैं। ऐसे में जहां शिक्षक ज्यादा हैं, वहां से उन्हें अन्य स्कूलों में भेजा जा रहा है, जहां उनकी ज़रूरत है।
कैसे हो रही है प्रक्रिया?
बिलासपुर में शिक्षकों की वरिष्ठता के आधार पर काउंसलिंग की जा रही है। इसमें शिक्षक खुद खाली पदों में से अपने पसंद के स्कूलों का चयन कर रहे हैं। इससे पारदर्शिता और सहमति के साथ समायोजन हो रहा है।
सभी स्कूलों में अब पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध होंगे।
बच्चों को योग्य और विषय विशेषज्ञ शिक्षक मिलेंगे।
छोटे और संसाधनहीन स्कूलों को पास के अच्छे स्कूलों के साथ जोड़ा जाएगा।
स्कूलों में लाइब्रेरी, कंप्यूटर लैब, विज्ञान प्रयोगशाला जैसी सुविधाएं अधिक बच्चों तक पहुंचेंगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी शिक्षा का स्तर सुधरेगा।
इस बदलाव से बच्चों को पढ़ाई के बेहतर अवसर मिलेंगे और सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था पहले से ज्यादा मज़बूत होगी।
शिक्षा विभाग का मानना है कि इस पहल से आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के स्कूलों की तस्वीर बदलेगी।





