बिलासपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सहकारी बैंक कर्मचारियों की बर्खास्तगी निरस्त,

बिलासपुर हाईकोर्ट
बिलासपुर हाईकोर्ट ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के कर्मचारियों की बर्खास्तगी को अवैध ठहराते हुए उन्हें सेवा में बहाल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना सुनवाई का अवसर दिए की गई जांच एकतरफा मानी जाएगी और यह सेवा समाप्ति का आधार नहीं हो सकती। हालांकि, बैंक प्रबंधन द्वारा अभी तक कर्मचारियों को ज्वाइनिंग नहीं दी गई है, जिससे हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना हो रही है।​

मामला:

वर्ष 2014 में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक द्वारा 110 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। याचिकाकर्ता पंकज कुमार तिवारी सहित अन्य उम्मीदवारों ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन किया और नियुक्ति पाई। लेकिन भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायत पर जांच समिति गठित की गई और जांच रिपोर्ट के आधार पर नवंबर 2015 में कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी गई। इसके खिलाफ कर्मचारियों ने संयुक्त पंजीयक और राज्य सहकारी अधिकरण तक न्याय की गुहार लगाई, लेकिन राहत नहीं मिली।​

हाईकोर्ट का आदेश:

बाद में याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में अपील की, जहां अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और घनश्याम कश्यप ने दलील दी कि जांच एकतरफा और बिना सुनवाई के हुई। कोर्ट ने सभी तर्कों को स्वीकार करते हुए सेवा समाप्ति आदेश को निरस्त कर दिया और कर्मचारियों को बहाल करने का निर्देश दिया।​

कर्मचारियों का आरोप:

कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें ज्वाइनिंग नहीं दी जा रही और आदेश की कॉपी भी स्वीकार नहीं की जा रही है। यह सीधे तौर पर हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना मानी जा रही है।

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