हेमंत सोरेन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से किया इंकार

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. ईडी ने उनकी जमानत को लेकर हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था लेकिन अदालत ने ED की याचिका खारिज कर दी है.

जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने मामले की सुनवाई की. देश की सर्वोच्च अदालत ने रांची हाईकोर्ट के उस फैसले को तर्कसंगत माना है जिसमें कहा गया है कि प्रारंभिक दृष्टि में हेमंत सोरेन मनी लॉन्ड्रिंग के दोषी नहीं हैं.

सुप्रीम कोर्ट से ईडी को बड़ा झटका

ASG एसवी राजू ने आपत्ति जताई है कि PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों पर हाईकोर्ट ने अविश्वास जताया है, उन्होंने कहा कि जमानत के लिए तो CrPC की धारा 161 के तहत बयान पर भी भरोसा किया जाता है. ASG ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में बहुत खामियां हैं और उसे रद्द किया जाना चाहिए. लेकिन जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले को बिलकुल सही बताते हुए इसमें दखल देने से इनकार कर दिया है.

एसवी राजू ने जब इसे लेकर और तर्क देने की कोशिश की तो कोर्ट ने ASG को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर हम कुछ भी देखेंगे तो आप मुश्किल में पड़ जाएंगे. SC ने कहा कि राजस्व कर्मचारी भानु प्रताप के पास से मिले दस्तावेजों में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे इस घोटाले में हेमंत सोरेन की भूमिका नज़र आती हो.

5 महीने जेल में बिताकर लौटे हैं सोरेन

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जमीन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में 31 जनवरी को ईडी ने गिरफ्तार किया था. जिसके चलते उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था. करीब 5 महीने जेल में बिताने के बाद वो 28 जून को जमानत पर बाहर आए. रांची हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने सोरेन को कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दी, जिसके बाद हेमंत सोरेन ने दोबारा झारखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.

सोरेन पर जमीन घोटाले का आरोप

ईडी ने सोरेन पर 8.42 एकड़ के एक जमीन घोटाले का आरोप लगाया है. ईडी के मुताबिक ये जमीन खरीदी और बेची नहीं जा सकती थी, बावजूद इसके हेमंत सोरेन ने इस पर अवैध कब्जा किया. इस मामले में सोरेन का बयान दर्ज करने के लिए ईडी ने 8 अगस्त 2023 से 16 जनवरी 2024 तक 8 समन भेज डाले लेकिन सोरेन ईडी के सामने पेश नहीं हुए. हालांकि आठवें समन के बाद 20 जनवरी को ईडी ने हेमंत सोरेन का बयान दर्ज किया, जांच एजेंसी ने इसके बाद 23 जनवरी को एक बार फिर सोरेन को समन भेजा. इसके बाद सोरेन के दिल्ली आवास पर ईडी ने छानबीन की और आखिरकार 31 जनवरी को लंबी पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया था.

हाईकोर्ट ने 28 जून को दी थी जमानत

वहीं इस केस में सोरेन की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए रांची हाईकोर्ट ने कहा था कि यह मामला पूरी तरह से संभावनाओं पर आधारित है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ईडी ने अब तक इस बात का कोई पक्का सबूत पेश नहीं किया है कि जमीन के कब्जे में हेमंत सोरेन की कोई सीधी भूमिका है. लिहाजा हाईकोर्ट ने 28 जून को हेमंत सोरेन को शर्तों के साथ जमानत दे दी, वहीं अदालत के इस फैसले के खिलाफ ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई और जमानत रद्द करने की मांग की लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मामले में दखल देने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी.

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