हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: मप्र से छत्तीसगढ़ लाया गया माल अब आयात माना जाएगा, याचिकाएं खारिज

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने विदेशी शराब पर आयात शुल्क संबंधी नोटिस को चुनौती देने वाली 24 साल पुरानी दो याचिकाओं को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश अब अलग राज्य है, इसलिए वहां से छत्तीसगढ़ लाया गया सामान अंतरराज्यीय व्यापार की श्रेणी में आएगा, जिस पर आयात शुल्क लिया जा सकता है। जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच ने यह फैसला सुनाया।
यह मामला बिलासपुर के शराब कारोबारियों गोल्डी वाइन प्राइवेट लिमिटेड और सतविंदर सिंह भाटिया से जुड़ा है। उन्हें सहायक आबकारी आयुक्त बिलासपुर ने वर्ष 2000–01 के दौरान मध्यप्रदेश से मंगाई गई विदेशी शराब पर आयात शुल्क चुकाने के लिए नोटिस जारी किया था। इस पर दोनों कारोबारियों ने वर्ष 2001 में हाई कोर्ट में याचिका दायर कर नोटिस को चुनौती दी थी। अब 2025 में लगभग 24 साल बाद कोर्ट ने फैसला सुनाया।
याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि उन्हें उस समय एनओसी के आधार पर शराब लाने की अनुमति दी गई थी और राज्य पुनर्गठन से पहले अतिरिक्त शुल्क की कोई व्यवस्था नहीं थी। उनका यह भी कहना था कि अगर पिछली तारीख से शुल्क लिया जाएगा, तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान होगा। हालांकि हाई कोर्ट ने सभी तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि मप्र से छत्तीसगढ़ लाया गया माल अब “आयात” की श्रेणी में आता है, और उस पर शुल्क लिया जा सकता है। यह फैसला शराब कारोबार से जुड़े कई पुराने मामलों के लिए एक मिसाल बन सकता है।





