भोपाल साइंस हाउस पैथोलॉजी घोटाला: 12 लाख टेस्टों के बदले 943 करोड़ का भुगतान उजागर

भोपाल के सरकारी अस्पतालों में आउटसोर्स पर चल रही पैथोलॉजी सेवाओं में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने आरोप लगाया है कि साइंस हाउस प्राइवेट लिमिटेड सहित दो कंपनियों ने बिना जांच किए मरीजों की रिपोर्ट तैयार की और करोड़ों रुपये के बिल सरकारी खजाने से उठा लिए।
विधायक ने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में कई स्थानों पर मशीनें बंद रहीं, मरीजों को सुविधाएं नहीं मिलीं, फिर भी कंपनियों ने भारी-भरकम भुगतान ले लिया। कांग्रेस इस पूरे मामले को जनता के बीच उठाएगी और इसकी सीबीआई जांच की मांग की है।
वर्ष 2019 से अब तक कंपनियों ने 12 करोड़ 84 लाख से अधिक पैथोलॉजी जांचें दिखाईं, जिसके बदले सरकार ने साइंस हाउस प्राइवेट लिमिटेड और पीओसीटी साइंस हाउस प्राइवेट लिमिटेड को कुल 943 करोड़ रुपये का भुगतान किया। ये जानकारी विधानसभा में दिए गए लिखित उत्तर में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने भी स्वीकार की।
जिला अस्पताल और 35 सिविल अस्पताल मिलाकर कुल 85 अस्पतालों में जांच का काम इन कंपनियों को सौंपा गया था। आरोप है कि कंपनी संचालकों पर पहले से आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) में एफआईआर दर्ज है और आयकर विभाग ने भी छापे मारे थे, इसके बावजूद सरकार ने इसी वर्ष जुलाई में कंपनी की सेवाओं को एक साल के लिए बढ़ा दिया।
इस मामले के साथ ही सरकारी स्कूलों की अव्यवस्थाओं पर भी कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाए। विधायक देवेंद्र पटेल ने कहा कि रायसेन के कई सरकारी स्कूलों में छोटे बच्चों से झाड़ू लगवाया जा रहा है, शिक्षक नियमित नहीं आते और सप्ताह में केवल तीन-चार दिन ही कक्षाएं लगती हैं। इसकी शिकायत राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और मानवाधिकार आयोग से भी की गई है।
इसके अलावा गुना जिले के फतेहगढ़ संदीपनी विद्यालय में 34 छात्रों के नाम पर फर्जी खाते खोलकर छात्रवृत्ति की राशि अन्य खातों में ट्रांसफर करने का मामला भी सामने आया है। उदाहरण के तौर पर शिवपुरी की 12वीं की छात्रा मुस्कान कुशवाह की छात्रवृत्ति की राशि बिहार में ट्रांसफर हो गई।
एनएसयूआई ने बच्चों के अधिकारों और भविष्य की रक्षा के लिए आंदोलन करने की घोषणा की है।





