अश्विनी वैष्णव का बड़ा बयान: सोशल मीडिया पर उम्र सीमा पर चर्चा, AI और सेमीकंडक्टर में 200 अरब डॉलर निवेश की उम्मीद

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि सरकार सोशल मीडिया पर उम्र-आधारित सीमाएं तय करने को लेकर टेक कंपनियों से चर्चा कर रही है। इसका मकसद कम उम्र के यूजर्स को ऑनलाइन खतरों से सुरक्षित रखना है। हालांकि अभी तक कोई अंतिम नियम या तय उम्र सीमा घोषित नहीं की गई है।

उन्होंने यह बात भारत मंडपम में आयोजित #IndiaAIImpactSummit में कही।

युवाओं की सुरक्षा पर फोकस

मंत्री ने कहा कि अलग-अलग उम्र के लोगों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस पर संभावित सीमाओं पर विचार हो रहा है। बच्चों और समाज को सुरक्षित रखने के लिए इंडस्ट्री और संसदीय समितियों के साथ बातचीत जारी है।

उन्होंने डीपफेक के बढ़ते खतरे पर भी चिंता जताई और कहा कि इससे निपटने के लिए मजबूत और टेक्नो-लीगल (तकनीकी + कानूनी) ढांचा जरूरी है।

AI और सेमीकंडक्टर में बड़ा निवेश

वैष्णव ने बताया कि आने वाले दो वर्षों में AI स्टैक की पांचों लेयर में 200 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश देखने को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी लेयर में भी भारी निवेश रुचि दिख रही है।

उन्होंने कहा कि भारत की 51% से ज्यादा बिजली उत्पादन क्षमता क्लीन एनर्जी से आती है, जो देश के लिए बड़ा फायदा है।

टैलेंट और नई तकनीक पर काम

केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, सरकार तीन मोर्चों पर काम कर रही है-

  1. मौजूदा वर्कफोर्स की री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग
  2. नई टैलेंट पाइपलाइन तैयार करना
  3. अगली पीढ़ी को नई तकनीक के लिए तैयार करना

अब तक 100 से ज्यादा कॉलेजों में आईटी इंडस्ट्री के साथ मिलकर टैलेंट को प्रशिक्षित किया जा रहा है।

चिप डिजाइन और ‘सॉवरेन AI’ पर जोर

वैष्णव ने कहा कि भारत का सेमीकंडक्टर मिशन AI से जुड़ा हुआ है और अगले चरण में चिप डिजाइन पर मुख्य फोकस रहेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले वर्षों में कम से कम 50 डीप-टेक कंपनियां उभरेंगी।

उन्होंने ‘सॉवरेन AI’ का जिक्र करते हुए कहा कि भारत अपने खुद के AI मॉडल विकसित करना चाहता है, ताकि रणनीतिक जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम हो सके।

कंपनियों को कानून मानना होगा

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नेटफ्लिक्स, यूट्यूब, मेटा और X जैसी कंपनियों को भारत के संवैधानिक और कानूनी दायरे में काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर देश का सांस्कृतिक संदर्भ अलग होता है और कंपनियों को स्थानीय नियमों का सम्मान करना होगा।

उन्होंने दोहराया कि AI को अच्छे कामों के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए और इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए वैश्विक स्तर पर सहमति बन रही है।

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