अमित शाह का बस्तर दौरा, नक्सलवाद पर बड़े ऐलान के संकेत

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एक दिवसीय दौरे पर जगदलपुर पहुंचे, जहां उन्होंने बस्तर पंडुम के समापन समारोह में भाग लिया। यह दौरा ऐसे समय पर हुआ है, जब बस्तर संभाग में नक्सल विरोधी अभियानों में तेजी आई है और सुरक्षा बल लगातार कार्रवाई कर रहे हैं।
सरकार ने बस्तर को नक्सलमुक्त बनाने के लिए 31 मार्च 2026 की समयसीमा तय की है। इस लक्ष्य को लेकर केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर रणनीति पर काम कर रही हैं। हाल के महीनों में यह अमित शाह का दूसरा बस्तर दौरा है, जिससे इसे नक्सल उन्मूलन की दिशा में अहम माना जा रहा है।
रायपुर में हुई उच्चस्तरीय बैठक में अमित शाह ने कहा कि अब देश का 90 प्रतिशत क्षेत्र माओवाद से मुक्त हो चुका है। उन्होंने दोहराया कि सरकार बिना हिंसा के इस समस्या का समाधान चाहती है और आत्मसमर्पण करने वालों का सम्मानपूर्वक स्वागत किया जाएगा।
गृह मंत्री ने नक्सलवाद को एक विचारधारात्मक समस्या बताया और कहा कि इसका संबंध केवल विकास या कानून-व्यवस्था से नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह एक ऐसी सोच है, जो समाज और देश के लिए घातक साबित हुई है।
बस्तर पंडुम के मंच से जनजातीय कलाकारों ने अपनी लोकसंस्कृति और परंपराओं की प्रस्तुति दी। इस आयोजन के माध्यम से स्थानीय समाज को मुख्यधारा से जोड़ने और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का प्रयास किया गया।
जगदलपुर के कार्यक्रम स्थल और आसपास के क्षेत्रों में तीन स्तरों की सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। केंद्रीय बल, राज्य पुलिस और स्थानीय एजेंसियों की तैनाती के साथ सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए।
अमित शाह ने कहा कि माओवादियों ने वर्षों तक विकास को रोके रखा, लेकिन अब बस्तर तेजी से प्रगति की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले वर्षों में बस्तर देश का सबसे विकसित आदिवासी क्षेत्र बनेगा।
उन्होंने माओवादियों से हथियार छोड़ने की अपील करते हुए कहा कि सरकार संवाद और पुनर्वास के रास्ते पर विश्वास करती है। साथ ही, उन्होंने भरोसा जताया कि तय समयसीमा के भीतर नक्सलवाद का पूरी तरह अंत कर दिया जाएगा।
इस दौरे को केंद्र सरकार की संतुलित रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें सुरक्षा, विकास, संस्कृति और विश्वास निर्माण को समान महत्व दिया जा रहा है। बस्तर में शांति और स्थिरता स्थापित करने की दिशा में यह दौरा एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।





