कनाडा में NSA डोभाल-नाथाली बैठक के बाद एसएफजे पर एक्शन, खालिस्तानी नेता गोसाल गिरफ्तार

दिल्ली। कनाडा में खालिस्तान समर्थक नेता इंदरजीत सिंह गोसाल की गिरफ्तारी और नई दिल्ली में हुए उच्चस्तरीय सुरक्षा वार्ता के बाद सिख फार जस्टिस (एसएफजे) के खिलाफ कार्रवाई तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। 18 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और उनके कनाडाई समकक्ष नाथाली जी. ड्रौइन की बैठक के बाद दोनों पक्षों ने आतंकवाद-विरोधी सहयोग और खुफिया साझेदारी को प्राथमिकता देने का हवाला दिया।

सूत्रों के मुताबिक, कनाडाई खुफिया एजेंसियों की रिपोर्टों में यह बात उभरी कि कुछ खालिस्तानी तत्व कनाडा की धरती का उपयोग आतंकी गतिविधियों के लिए धन जुटाने और संगठित करने में कर रहे हैं। इसी बाद अधिकारियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान और संयुक्त कार्रवाई के साथ मामलों पर कदम उठाए जाने लगे।

कनाडा में गिरफ्तार इंदरजीत सिंह गोसाल को एसएफजे का प्रमुख समन्वयक बताया जा रहा है और उन पर विभिन्न हथियार व आग्नेयास्त्र संबंधी आरोप लगाए गए हैं। गोसाल की गिरफ्तारी को उन संकेतों में से एक माना जा रहा है जिनसे यह मजबूत संकेत मिलता है कि टकराव के माहौल को बदलकर सहयोग की दिशा में काम शुरू हुआ है।

भारतीय सुरक्षा एजेंसियाँ नियमित रूप से कनाडाई पक्ष के साथ खुफिया जानकारी साझा कर रही हैं और इस बार ध्यान विशेष रूप से एसएफजे पर केंद्रित रहा। भारत का कहना है कि एसएफजे केवल प्रचार-प्रसार तक सीमित नहीं है; उसकी गतिविधियाँ सामूहिक रूप से खतरनाक और उकसाने वाली रही हैं—जिसमें कुछ अभियानों ने सीधे राष्ट्रीय नेतृत्व को निशाना भी बनाया है। अगर कनाडा ने समय रहते कार्रवाई नहीं की तो भारत की चिंताएँ और बढ़ सकती थीं, पर हालिया गिरफ्तारियों से दोनों देशों के बीच भरोसेमंद सुरक्षा संवाद के संकेत मिल रहे हैं।

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