मणिपुर और अरुणाचल में फिर लागू हुआ AFSPA, जानिए क्या है यह कानून

मणिपुर में हाल ही में हुई हिंसा के मद्देनजर केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। पूरे राज्य में सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) को फिर से लागू कर दिया गया है, केवल 13 पुलिस थाना क्षेत्रों को इससे बाहर रखा गया है। गृह मंत्रालय ने रविवार को इस फैसले की घोषणा की। इसके अलावा, अरुणाचल प्रदेश के कुछ जिलों में भी AFSPA को छह महीने के लिए बढ़ा दिया गया है।

मणिपुर में हिंसा और AFSPA की वापसी

मणिपुर में पिछले कुछ महीनों से हिंसा की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने भी हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद, 13 फरवरी की शाम को राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया और विधानसभा को निलंबित कर दिया गया। यह फैसला राज्य में बढ़ती जातीय हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता के कारण लिया गया।

मणिपुर में AFSPA पहले भी लागू था, लेकिन 2022 में कुछ क्षेत्रों से इसे हटा लिया गया था। अब, ताजा हिंसा को देखते हुए इसे फिर से लगभग पूरे राज्य में लागू कर दिया गया है।

अरुणाचल प्रदेश में भी बढ़ा AFSPA

सिर्फ मणिपुर ही नहीं, अरुणाचल प्रदेश में भी AFSPA को बढ़ा दिया गया है। गृह मंत्रालय के अनुसार, तिरप, चांगलांग और लोंगडिंग जिलों और नामसाई, महादेवपुर और चौखान पुलिस थानों को ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित कर दिया गया है। इन इलाकों में भी अब यह कानून अगले छह महीने तक लागू रहेगा।

AFSPA के खिलाफ विरोध

मणिपुर में AFSPA को लेकर पहले भी विरोध होते रहे हैं। 2004 में थंगजाम मनोरमा नाम की एक महिला की कथित हत्या और बलात्कार के बाद इस कानून को हटाने की मांग तेज हो गई थी। वहीं, नागरिक अधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला ने 2000 में इसके खिलाफ भूख हड़ताल शुरू की थी, जो 16 साल तक चली।

क्या है AFSPA?

AFSPA, यानी सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम, 1958 में लागू किया गया था। यह कानून भारतीय सशस्त्र बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को उन क्षेत्रों में विशेष शक्तियां देता है, जिन्हें सरकार ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित करती है। आमतौर पर, यह उन जगहों पर लागू किया जाता है जहां उग्रवाद और हिंसा की घटनाएं अधिक होती हैं।

AFSPA के मुख्य प्रावधान

1. बल प्रयोग करने की शक्ति – सुरक्षाबलों को हिंसक गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ बल प्रयोग करने, यहां तक कि गोली चलाने तक की अनुमति होती है।

2. गिरफ्तारी और तलाशी – सुरक्षाकर्मी बिना वारंट के किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकते हैं और किसी भी स्थान की तलाशी ले सकते हैं।

3. कानूनी प्रतिरक्षा – AFSPA के तहत किए गए किसी भी कार्य के लिए सुरक्षाबलों पर कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती, जब तक कि केंद्र सरकार की मंजूरी न हो।

4. ‘अशांत क्षेत्र’ की घोषणा – राज्य या केंद्र सरकार किसी भी क्षेत्र को ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित कर सकती है, जिसके बाद वहां यह कानून लागू हो जाता है।

भारत में कहां-कहां लागू है AFSPA?

वर्तमान में, AFSPA पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में लागू है। इसमें असम, नागालैंड, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश के कुछ जिले शामिल हैं। पहले यह जम्मू-कश्मीर में भी लागू था, लेकिन 2019 में इसे हटा दिया गया था।

AFSPA को लेकर हमेशा से बहस होती रही है। सरकार का मानना है कि यह सुरक्षा बलों को हिंसाग्रस्त इलाकों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी शक्तियां देता है। दूसरी ओर, आलोचकों का कहना है कि इस कानून का दुरुपयोग होता है और यह मानवाधिकारों का उल्लंघन करता है।

मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में AFSPA की फिर से वापसी ने सुरक्षा और मानवाधिकारों के संतुलन को लेकर फिर से बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि आने वाले महीनों में इसका क्या असर पड़ता है।

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